Penjelasan waktu-waktu shalat: zhuhur, ashar, maghrib, isya, dan subuh
Imam Bukhari : 729
حَدَّثَنَا آدَمُ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا سَيَّارُ بْنُ سَلَامَةَ قَالَدَخَلْتُ أَنَا وَأَبِي عَلَى أَبِي بَرْزَةَ الْأَسْلَمِيِّ فَسَأَلْنَاهُ عَنْ وَقْتِ الصَّلَوَاتِ فَقَالَ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي الظُّهْرَ حِينَ تَزُولُ الشَّمْسُ وَالْعَصْرَ وَيَرْجِعُ الرَّجُلُ إِلَى أَقْصَى الْمَدِينَةِ وَالشَّمْسُ حَيَّةٌ وَنَسِيتُ مَا قَالَ فِي الْمَغْرِبِ وَلَا يُبَالِي بِتَأْخِيرِ الْعِشَاءِ إِلَى ثُلُثِ اللَّيْلِ وَلَا يُحِبُّ النَّوْمَ قَبْلَهَا وَلَا الْحَدِيثَ بَعْدَهَا وَيُصَلِّي الصُّبْحَ فَيَنْصَرِفُ الرَّجُلُ فَيَعْرِفُ جَلِيسَهُ وَكَانَ يَقْرَأُ فِي الرَّكْعَتَيْنِ أَوْ إِحْدَاهُمَا مَا بَيْنَ السِّتِّينَ إِلَى الْمِائَةِ
हमका बतावा गा है [आदम] कहिन, हमसे बतावा गा है [सय्यार बिन सलामा] कहिन, 'हम अऊर हमार पिता [अबू बरजाह अल असलमी] का देखै आये रहेन, फिर हम उनसे नमाज के समय के बारे मा पूछेन'। फिर उ कहिन, 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम धूहर नमाज तब पढ़िन जब सूरज झुकत रहा, असर नमाज तब पढ़िन जब सूरज तपत रहा तब केहू मदीना के किनारे लौटि आवा, अऊर हम भूल गयेन कि उ मगरिब के नमाज के बारे मा का समझाइन। अऊर रात के आखिरी तिहाई तक ईशा नमाज खतम करब उनके लिए असामान्य नाहीं रहा, ईशा नमाज से पहिले सोवै अऊर बाद मा गप्पे मारब उनका पसंद नाहीं रहा। अऊर उ फजर नमाज एक अइसन समय मा पढ़िन जब जब ई खतम होइ जात रहा, तौ केहू पहचान पावत रहा कि उनके बगल मा कौन नमाज पढ़त रहा। उ फजर नमाज मा सूरा दुइनौ रकात मा पढ़िन, या ओनमा से एक मा लगभग साठ से सौ आयत पढ़िन'।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 6671, 6698, 6780, 11862, 12262, 14441, 18931, 18959, 18972
Imam Bukhari : 508, 514, 527, 532, 564, 729
Imam Muslim : 964, 965, 966, 967, 969, 970, 971, 1023
Imam Abu Dawud : 334, 335, 336, 337
Imam Tirmidzi : 139, 140
Imam Nasa'i : 516, 519, 520, 521, 524, 549
Imam Ibnu Majah : 659
Imam Malik : 6
Imam Darimi : 1161, 1267