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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Kabarkan kepadaku suatu amal yang akan memasukkan aku kedalam surga

Imam Bukhari : 61

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ سَعِيدٍ هُوَ الْمَقْبُرِيُّ عَنْ شَرِيكِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي نَمِرٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُبَيْنَمَا نَحْنُ جُلُوسٌ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْمَسْجِدِ دَخَلَ رَجُلٌ عَلَى جَمَلٍ فَأَنَاخَهُ فِي الْمَسْجِدِ ثُمَّ عَقَلَهُ ثُمَّ قَالَ لَهُمْ أَيُّكُمْ مُحَمَّدٌ وَالنَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُتَّكِئٌ بَيْنَ ظَهْرَانَيْهِمْ فَقُلْنَا هَذَا الرَّجُلُ الْأَبْيَضُ الْمُتَّكِئُ فَقَالَ لَهُ الرَّجُلُ يَا ابْنَ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ أَجَبْتُكَ فَقَالَ الرَّجُلُ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي سَائِلُكَ فَمُشَدِّدٌ عَلَيْكَ فِي الْمَسْأَلَةِ فَلَا تَجِدْ عَلَيَّ فِي نَفْسِكَ فَقَالَ سَلْ عَمَّا بَدَا لَكَ فَقَالَ أَسْأَلُكَ بِرَبِّكَ وَرَبِّ مَنْ قَبْلَكَ أَاللَّهُ أَرْسَلَكَ إِلَى النَّاسِ كُلِّهِمْ فَقَالَ اللَّهُمَّ نَعَمْ قَالَ أَنْشُدُكَ بِاللَّهِ أَاللَّهُ أَمَرَكَ أَنْ نُصَلِّيَ الصَّلَوَاتِ الْخَمْسَ فِي الْيَوْمِ وَاللَّيْلَةِ قَالَ اللَّهُمَّ نَعَمْ قَالَ أَنْشُدُكَ بِاللَّهِ أَاللَّهُ أَمَرَكَ أَنْ نَصُومَ هَذَا الشَّهْرَ مِنْ السَّنَةِ قَالَ اللَّهُمَّ نَعَمْ قَالَ أَنْشُدُكَ بِاللَّهِ أَاللَّهُ أَمَرَكَ أَنْ تَأْخُذَ هَذِهِ الصَّدَقَةَ مِنْ أَغْنِيَائِنَا فَتَقْسِمَهَا عَلَى فُقَرَائِنَا فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اللَّهُمَّ نَعَمْ فَقَالَ الرَّجُلُ آمَنْتُ بِمَا جِئْتَ بِهِ وَأَنَا رَسُولُ مَنْ وَرَائِي مِنْ قَوْمِي وَأَنَا ضِمَامُ بْنُ ثَعْلَبَةَ أَخُو بَنِي سَعْدِ بْنِ بَكْرٍوَرَوَاهُ مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ وَعَلِيُّ بْنُ عَبْدِ الْحَمِيدِ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ المُغِيرَةِ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِهَذَا

हमसे कहिन [अब्दुल्ला बिन यूसुफ] कहिन, हमसे [अल लैट्स] से [सैद अल मकबुरी] से [स्यारिक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू नमीर] से कहिन कि उ [अनस बिन मलिक] का कहत सुने रहे: जब हम मस्जिद मा पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे बैठे रहेन, तौ एक आदमी मस्जिद के पास आवा अऊर ओनसे कहिस -साथी-: 'तुममें से कौन मुहम्मद कहलाता है?' उस समय पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम साथियों के बीच में पीछे झुक गए, फिर हमने जवाब दिया: 'यह व्यक्ति, गोरा वाला पीछे झुक रहा है'। ऊ मनई ओसे कहिस; 'हे अब्दुल मुठालिब के बेटवा' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'हाँ, हम तोहका जवाब देहे हई'। तौ उ व्यक्ति पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन: 'मैं आपसे एक सवाल पूछत हउँ जवन आपके लिए कठिन होइ सकत है लेकिन मोर प्रति कुछौ महसूस न करौ'। तो पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'पूछो कि आपकी समस्या क्या है'। ऊ आदमी कहिस: 'मैं तोहसे अपने रब्ब अऊर तोहरे से पहिले के रब्ब के खातिर पूछत हउँ। का ई अल्लाह रहा जे तोहका सब मनई के पास भेजिस रहा?' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'अल्लाह कसम, हाँ है!' व्यक्ति ने कहा: 'मैं अल्लाह के नाम से कसम खाता हूँ, क्या अल्लाह ही आपको हुकुम दिया है कि हम दिन-रात पांच बार नमाज पढ़ें?' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'अल्लाह कसम, हाँ है!' व्यक्ति ने कहा: 'मैं अल्लाह के नाम से कसम खाता हूँ, क्या अल्लाह ही आपको हुकुम दिया है कि हम हर साल इस महीने रोजा रखें?' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'अल्लाह कसम, हाँ है!' व्यक्ति ने कहा: 'मैं अल्लाह के नाम से कसम खात हौं, का ई अल्लाह है जे तोहका हुकुम दिहिस है कि हमरे बीच के अमीरन से दान लीन जाय अऊर फिर हमरे बीच के गरीबन का बांटौ?' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'अल्लाह कसम, हाँ है!' व्यक्ति ने कहा: 'मैं आपके लाए गए चीजन मा विश्वास करत हउँ अऊर मैं अपने लोगन के दूत हउँ, मैं बानी सद बिन बकर के भाई दलामम बिन त्सा'लाबाह हउँ'। यही कहानी है - जैसा कि [मूसा बिन इस्माइल] अऊर [अली बिन अब्दुल हमीद] द्वारा [सुलेमान बिन अल मुघिराह] से [थाबित] से [अनस] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा सुनावा गा है

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 1318, 5592, 14220, 15321, 18364, 18374, 18422, 18436, 18441, 21008, 21705, 22082, 22407, 22437, 22448, 25901, 25902
Imam Bukhari : 44, 61, 1309, 1310, 1758, 2481, 5524, 6442
Imam Muslim : 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18
Imam Abu Dawud : 331, 2830
Imam Tirmidzi : 562
Imam Nasa'i : 454, 464, 2063, 4106, 4905, 4942
Imam Malik : 382
Imam Darimi : 648