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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 20922

حَدَّثَنَا بَهْزٌ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُمْهَانَ عَنْ سَفِينَةَ قَالَ كُنَّا فِي سَفَرٍ قَالَ فَكَانَ كُلَّمَا أَعْيَا رَجُلٌ أَلْقَى عَلَيَّ ثِيَابَهُ تُرْسًا أَوْ سَيْفًا حَتَّى حَمَلْتُ مِنْ ذَلِكَ شَيْئًا كَثِيرًا قَالَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْتَ سَفِينَةُ

हमसे कहिस है [बहज़] हमसे [हम्मद बिन सलामा] से [सैद बिन जुम्हान] से [सफीना] से कहिस है, उ कहिन; हम एक बार रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथ यात्रा पर रहे, हर बार कोई थक जात रहा, तो उ आपन झोरा, आपन ढाल या आपन तलवार मोर ऊपर तब तक फेंकत रहा जब तक कि मैं बहुत कुछ ढोवत रहा, तब पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम मुझसे कहिन; 'तुम सचमुच सफीना हो'।