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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Nabi SAW tidak berpuasa lebih banyak pada bulan lain selain Sya’ban

Imam Ahmad : 20758

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا ثَابِتُ بْنُ قَيْسٍ أَبُو غُصْنٍ حَدَّثَنِي أَبُو سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيُّ حَدَّثَنِي أُسَامَةُ بْنُ زَيْدٍ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصُومُ الْأَيَّامَ يَسْرُدُ حَتَّى يُقَالَ لَا يُفْطِرُ وَيُفْطِرُ الْأَيَّامَ حَتَّى لَا يَكَادَ أَنْ يَصُومَ إِلَّا يَوْمَيْنِ مِنْ الْجُمُعَةِ إِنْ كَانَا فِي صِيَامِهِ وَإِلَّا صَامَهُمَا وَلَمْ يَكُنْ يَصُومُ مِنْ شَهْرٍ مِنْ الشُّهُورِ مَا يَصُومُ مِنْ شَعْبَانَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّكَ تَصُومُ لَا تَكَادُ أَنْ تُفْطِرَ وَتُفْطِرَ حَتَّى لَا تَكَادَ أَنْ تَصُومَ إِلَّا يَوْمَيْنِ إِنْ دَخَلَا فِي صِيَامِكَ وَإِلَّا صُمْتَهُمَا قَالَ أَيُّ يَوْمَيْنِ قَالَ قُلْتُ يَوْمُ الِاثْنَيْنِ وَيَوْمُ الْخَمِيسِ قَالَ ذَانِكَ يَوْمَانِ تُعْرَضُ فِيهِمَا الْأَعْمَالُ عَلَى رَبِّ الْعَالَمِينَ وَأُحِبُّ أَنْ يُعْرَضَ عَمَلِي وَأَنَا صَائِمٌ قَالَ قُلْتُ وَلَمْ أَرَكَ تَصُومُ مِنْ شَهْرٍ مِنْ الشُّهُورِ مَا تَصُومُ مِنْ شَعْبَانَ قَالَ ذَاكَ شَهْرٌ يَغْفُلُ النَّاسُ عَنْهُ بَيْنَ رَجَبٍ وَرَمَضَانَ وَهُوَ شَهْرٌ يُرْفَعُ فِيهِ الْأَعْمَالُ إِلَى رَبِّ الْعَالَمِينَ فَأُحِبُّ أَنْ يُرْفَعَ عَمَلِي وَأَنَا صَائِمٌ

हमसे [अब्दुर्रहमान बिन महदी] बताइस है, हमसे कहिस है [थाबित बिन कैस अबू घुशन], हमसे कहिस है [अबू सईद अल मकबुरी], हमसे कहिस है [उसामा बिन जैद] उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लगातार कई दिन तक रोजा रखिन, इ हद तक कि कहा जात रहा कि उ आपन रोजा कभी नाहीं तोड़िन। अऊर उ कई दिनन तक व्रत भी तोड़त रहा जब तक कि लगभग उ सप्ताह मा दुइ दिन के अलावा उपवास नाहीं करत रहा, अर्थात् उ दुइ दिन जवन उ आमतौर पर उपवास के लिए उपयोग करत है, नाहीं तौ -लगातार उपवास करत रहा-, तब उ उ दुइ दिन उपवास करत रहा। अऊर उ शबान के महीना के अलावा ज्यादा उपवास नाहीं किहिन, हम पूछेन; 'हे अल्लाह के रसूल, आप अइसे रोजा रखत हय जैसे आपने कभी रोजा न तोड़ा हो अऊर आप रोजा अइसे तोड़त हय जैसे आपने दुई दिन यानी सोमवार अऊर गुरुवार के अलावा कबहूँ रोजा नाहीं रखा हो'। उन्होंने कहा: 'वह दो दिन हैं जिनमें एक सेवक के कर्म लोकों के रब्ब के सामने प्रदर्शित होते हैं, जब मेरे कर्म प्रदर्शित होते हैं तो मैं खुश होता हूँ, मैं उपवास रखता हूँ'। उसामाह जारी रखिन; हम अगला कहेन; 'अऊर हम तोहका शबान के महीना के अलावा ज्यादा उपवास करत नाहीं देखित?'। उ कहिन: 'वही महीना है जेहिका बहुत लोग रजब अऊर रमजान के महीना के बीच उपेक्षा करत हैं, अर्थात् उ महीना है जेहिमा अच्छा काम प्रदर्शित होत हैं, अऊर मोका अच्छा लागत है जब मोर काम मोर प्रभु के सामने देखावा जात है, जब मैं रोजा रखत हौं'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 20758, 23402, 23613, 23819, 23949, 24039, 24154, 24382, 24773, 24860, 24928, 25106, 25308, 25351, 25434
Imam Bukhari : 1833
Imam Muslim : 1956, 1957
Imam Abu Dawud : 1989, 2079
Imam Nasa'i : 2147, 2148, 2150, 2152, 2311, 2313, 2314, 2316, 2317
Imam Ibnu Majah : 1639, 1700
Imam Malik : 601