Imam Ahmad : 20572
حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَخْبَرَنَا الْمَسْعُودِيُّ عَنْ أَبِي عَمْرٍو الشَّامِيِّ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ الْخَشْخَاشِ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَ أَتَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ فِي الْمَسْجِدِ فَجَلَسْتُ إِلَيْهِ فَقَالَ يَا أَبَا ذَرٍّ هَلْ صَلَّيْتَ قُلْتُ لَا قَالَ قُمْ فَصَلِّ قَالَ فَقُمْتُ فَصَلَّيْتُ ثُمَّ أَتَيْتُهُ فَجَلَسْتُ إِلَيْهِ فَقَالَ لِي يَا أَبَا ذَرٍّ اسْتَعِذْ بِاللَّهِ مِنْ شَرِّ شَيَاطِينِ الْإِنْسِ وَالْجِنِّ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَهَلْ لِلْإِنْسِ مِنْ شَيَاطِينَ قَالَ نَعَمْ يَا أَبَا ذَرٍّ أَلَا أَدُلُّكَ عَلَى كَنْزٍ مِنْ كُنُوزِ الْجَنَّةِ قَالَ قُلْتُ بَلَى بِأَبِي أَنْتَ وَأُمِّي قَالَ قُلْ لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ فَإِنَّهَا كَنْزٌ مِنْ كُنُوزِ الْجَنَّةِ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَمَا الصَّلَاةُ قَالَ خَيْرٌ مَوْضُوعٌ فَمَنْ شَاءَ أَكْثَرَ وَمَنْ شَاءَ أَقَلَّ قَالَ قُلْتُ فَمَا الصِّيَامُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَرْضٌ مُجْزِئٌ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَمَا الصَّدَقَةُ قَالَ أَضْعَافٌ مُضَاعَفَةٌ وَعِنْدَ اللَّهِ مَزِيدٌ قَالَ قُلْتُ أَيُّهَا أَفْضَلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ جُهْدٌ مِنْ مُقِلٍّ أَوْ سِرٌّ إِلَى فَقِيرٍ قُلْتُ فَأَيُّ مَا أَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ عَلَيْكَ أَعْظَمُ قَالَ { اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ } حَتَّى خَتَمَ الْآيَةَ قُلْتُ فَأَيُّ الْأَنْبِيَاءِ كَانَ أَوَّلَ قَالَ آدَمُ قُلْتُ أَوَنَبِيٌّ كَانَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ نَبِيٌّ مُكَلَّمٌ قُلْتُ فَكَمْ الْمُرْسَلُونَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ثَلَاثُ مِائَةٍ وَخَمْسَةَ عَشَرَ جَمًّا غَفِيرًا
हमसे कहा गा है कि [यजीद] हमसे कहिन है कि [अल मसूदी] से [अबू अमरू असी स्यामी] से [उबैद बिन अल खासखसी] से [अबू ज़ार] कहिन, 'जब उ मस्जिद मा रहे तब हम रसूलुल्लाह सल्लाहु 'अलैही वसल्लम के पास गये रहेन, तब हम उनके सामने बैठे रहेन, उ कहिन: 'अबु ज़ार, का तुम प्रयेद'? हम जवाब दिहेन, 'अभी नाहीं'। उ कहिन: 'खड़ा होइके प्रार्थना करा!' मैं खड़ा होइके नमाज पढ़िन, फिर मैं उनसे मिला अऊर बैठ गइन, उ मोसे कहिन: 'हे अबू ज़ार, मानव राक्षस अऊर जिन्न के गड़बड़ी से अल्लाह के शरण ले'। हमने पूछा, 'हे अल्लाह के रसूल, क्या इंसान से कोई शैतान है?' उ जवाब दिहिन: 'हाँ। हे अबू ज़ार, का तुम चाहत हौ कि हम तोहका स्वर्ग के बचत से बचत देखावा?' हम जवाब दिहेन, 'हाँ, अपने पिता अऊर महतारी के लिए'। उन्होंने कहा: 'कहो ला हौला वाला क्व्वाता इल्ला बिल्लाही -अल्लाह के अलावा कोई शक्ति या प्रयास नहीं है-, काहे से कि ई स्वर्ग का जमा है'। हमने पूछा, 'हे अल्लाह के रसूल, नमाज का का?' उन्होंने जवाब दिया : 'वह सबसे अच्छी जगह है, जो चाहे वह बढ़ सकत है या घट सकत है'। हम फिर पूछेन, 'व्रत का का होई? ' उ जवाब दिहिन: 'उ पुरस्कार से भरा एक कर्तव्य है'। हम फिर पूछेन, 'भिक्षा का का होई? ' उ जवाब दिहिन: 'उ अल्लाह के साथे बहुत बढ़िहैं अऊर हमेशा बढ़िहैं'। हमने फिर पूछा कि 'सबसे जरूरी कौन सा है हे अल्लाह के रसूल? ' उ जवाब दिहिन: 'वास्तव मा जरूरत मा या गरीबन का गुप्त दान करत अहैं'। हमने फिर पूछा कि 'अल्लाह ने आप पर जो सबसे बड़ा अवरुद्ध किया है वह कौन सा है? ' उन्होंने जवाब दिया: 'अल्लाहु ला इल्लाह इल्ला हुवल हय्युल काय्युम -श्लोक कुर्सी-, ' श्लोक के अंत तक। हमने फिर पूछा, 'पहिला नबी कौन रहा? ' उ जवाब दिहिस: 'आदम'। हमने फिर पूछा कि ये कैसा नबी है या रसूल अल्लाह? ' उ जवाब दिहिन: 'एक नबी जेसे अल्लाह सीधे बात किहिन'। हमने फिर से पूछा, 'हे अल्लाह के रसूल, कितने रसूल भेजे गए? ' उ जवाब दिहिन: 'तीन सौ पन्द्रह, बहुत बड़ी संख्या'।