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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 20474

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ عَنْ دَاوُدَ بْنِ أَبِي هِنْدٍ عَنْ الْوَلِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْجُرَشِيِّ عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ الْحَضْرَمِيِّ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَ صُمْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَمَضَانَ فَلَمْ يَقُمْ بِنَا شَيْئًا مِنْ الشَّهْرِ حَتَّى بَقِيَ سَبْعٌ فَقَامَ بِنَا حَتَّى ذَهَبَ نَحْوٌ مِنْ ثُلُثِ اللَّيْلِ ثُمَّ لَمْ يَقُمْ بِنَا اللَّيْلَةَ الرَّابِعَةَ وَقَامَ بِنَا اللَّيْلَةَ الَّتِي تَلِيهَا حَتَّى ذَهَبَ نَحْوٌ مِنْ شَطْرِ اللَّيْلِ قَالَ فَقُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ نَفَّلْتَنَا بَقِيَّةَ لَيْلَتِنَا هَذِهِ قَالَ إِنَّ الرَّجُلَ إِذَا قَامَ مَعَ الْإِمَامِ حَتَّى يَنْصَرِفَ حُسِبَ لَهُ بَقِيَّةُ لَيْلَتِهِ ثُمَّ لَمْ يَقُمْ بِنَا السَّادِسَةَ وَقَامَ بِنَا السَّابِعَةَ وَقَالَ وَبَعَثَ إِلَى أَهْلِهِ وَاجْتَمَعَ النَّاسُ فَقَامَ بِنَا حَتَّى خَشِينَا أَنْ يَفُوتَنَا الْفَلَاحُ قَالَ قُلْتُ وَمَا الْفَلَاحُ قَالَ السُّحُورُ

हमसे कहिन है [अब्दुर्राजाक] हमसे कहिन है [सुफयान] से [दाऊद बिन अबू हिंद] से [वालिद बिन अब्दुर्रहमान अल जुर्सी] से [जुबैर बिन नुफैर अल हदलरामी] से [अबू ज़ार] उ कहिन, 'हम रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वालेही के साथ रमजान का उपवास किहिन, अऊर यहां तक कि उ नमाज के साथे तब तक नाहीं किहिन। पिछले सात दिन बाकी रहे। फिर उ हमरे साथे शाम के नमाज पढ़िन जब तक कि रात का एक तिहाई बीत न गवा। यहिके बाद उ चौथी रात हमरे साथे शाम के नमाज नाहीं पढ़त रहें, बल्कि अगली रात हमरे साथे तब तक पढ़त रहें जब तक कि आधी रात बीत नाहीं जात रही।' अबू धरर ने कहा, 'हमने तब पूछा, 'हे अल्लाह के रसूल, का आप इन बाकी रातन के अंत मा हमरे साथ नमाज पढ़ै मा बुरा मानब? ' उन्होंने कहा: 'अगर कोई आदमी इमाम के साथ अंत तक नमाज पढ़े तो उसकी बाकी रात नमाज के इनाम के साथ लिखी जाएगी'। फिर छठी रात हमरे साथ प्रार्थना नाहीं किहिन, सातवीं रात हमरे साथ प्रार्थना किहिन'। अबू ज़ार ने कहा, 'उन्होंने अपने परिवार का आदेश दिया, अऊर लोग एक साथ इकट्ठा होइ गए, तब तक उ हमरे साथ प्रार्थना किहिन जब तक कि हम अल फलाह के याद करै के बारे मा चिंतित नाइ होइ गयेन'। कथाकार ने कहा, 'मैंने तब पूछा, 'अल फलाह का है?' अबू ज़ार ने जवाब दिया, 'साहुर समय'।