Keutamaan menginfakkan sepasang harta di jalan Allah atau secara berpasangan
Imam Ahmad : 20379قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ مُسْلِمٍ يُنْفِقُ مِنْ كُلِّ مَالٍ لَهُ زَوْجَيْنِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ إِلَّا اسْتَقْبَلَتْهُ حَجَبَةُ الْجَنَّةِ كُلُّهُمْ يَدْعُوهُ إِلَى مَا عِنْدَهُ قُلْتُ وَكَيْفَ ذَاكَ قَالَ إِنْ كَانَتْ رِجَالًا فَرَجُلَيْنِ وَإِنْ كَانَتْ إِبِلًا فَبَعِيرَيْنِ وَإِنْ كَانَتْ بَقَرًا فَبَقَرَتَيْنِ
अभी भी उहे संचरण मार्ग से गुजर रहल बा जवन [अबू ज़ार] से पिछला हदीस से चलत रहे; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'इ मुसलमान के काम नईखे कि उ अल्लाह के राह में अपना धन से कवनो चीज़ के संगे दान देवे, जब तक कि स्वर्ग के रक्षक फरिश्ता ओकर स्वागत करे खाती दौड़-धूप ना करीहे, तब तक उ सभ ओकरा के कवनो चीज़ खाती बोलाईहे, जवन कि ओकरा के दिहल जाई'। हम -अबू ज़ार- तब पूछनी, 'कइसे रहे?' उ जवाब देले कि, 'अगर नर गुलाम बा त दु आदमी के संगे, अगर ऊंट बा त दु ऊंट के संगे, अवुरी गाय बा त दु गाय के संगे'।