Imam Ahmad : 26189
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي يَزِيدَ قَالَ إِنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ طَارِقِ بْنِ عَلْقَمَةَ أَخْبَرَهُ عَنْ أُمِّهِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا دَخَلَ مَكَانًا فِي دَارِ يَعْلَى نَسَبَهُ عُبَيْدُ اللَّهِ اسْتَقْبَلَ الْبَيْتَ فَدَعَا
उ हमसे कहिन है ['अब्दुर्राजाक] उ कहिन, उ हमसे कहिन हैं [इब्न जुरैज] उ कहिन, उ हमसे कहिन हैं ['उबैदुल्लाह बिन अबू यजीद] उ कहिन, कि ['अब्दुर्रहमान बिन थारिक बिन अल कमाह] ओनका [अपनी महतारी] से कहिन है कि जब पैगम्बर सल्लल्लाह वल्लाह एक घर मा प्रवेश किहिन। -'उबैदुल्लाह भूल गवा कि ई कहाँ रहा-, उ किबला का सामना किहिन अऊर नमाज पढ़िन'।