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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 26083

قَالَ فَلَمَّا أَرَدْتُ أَنْ أَخْرُجَ قَالَتْ اجْلِسْ حَتَّى أُحَدِّثَكَ حَدِيثًا عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ خَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمًا مِنْ الْأَيَّامِ فَصَلَّى صَلَاةَ الْهَاجِرَةِ ثُمَّ قَعَدَ فَفَزِعَ النَّاسُ فَقَالَ اجْلِسُوا أَيُّهَا النَّاسُ فَإِنِّي لَمْ أَقُمْ مَقَامِي هَذَا لِفَزَعٍ وَلَكِنَّ تَمِيمًا الدَّارِيَّ أَتَانِي فَأَخْبَرَنِي خَبَرًا مَنَعَنِي مِنْ الْقَيْلُولَةِ مِنْ الْفَرَحِ وَقُرَّةِ الْعَيْنِ فَأَحْبَبْتُ أَنْ أَنْشُرَ عَلَيْكُمْ فَرَحَ نَبِيِّكُمْ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَخْبَرَنِي أَنَّ رَهْطًا مِنْ بَنِي عَمِّهِ رَكِبُوا الْبَحْرَ فَأَصَابَتْهُمْ رِيحٌ عَاصِفٌ فَأَلْجَأَتْهُمْ الرِّيحُ إِلَى جَزِيرَةٍ لَا يَعْرِفُونَهَا فَقَعَدُوا فِي قُوَيْرِبِ سَفِينَةٍ حَتَّى خَرَجُوا إِلَى الْجَزِيرَةِ فَإِذَا هُمْ بِشَيْءٍ أَهْلَبَ كَثِيرِ الشَّعْرِ لَا يَدْرُونَ أَرَجُلٌ هُوَ أَوْ امْرَأَةٌ فَسَلَّمُوا عَلَيْهِ فَرَدَّ عَلَيْهِمْ السَّلَامَ فَقَالُوا أَلَا تُخْبِرُنَا فَقَالَ مَا أَنَا بِمُخْبِرِكُمْ وَلَا مُسْتَخْبِرِكُمْ وَلَكِنَّ هَذَا الدَّيْرَ قَدْ رَهِقْتُمُوهُ فَفِيهِ مَنْ هُوَ إِلَى خَبَرِكُمْ بِالْأَشْوَاقِ أَنْ يُخْبِرَكُمْ وَيَسْتَخْبِرَكُمْ قَالُوا قُلْنَا مَا أَنْتَ قَالَتْ أَنَا الْجَسَّاسَةُ فَانْطَلَقُوا حَتَّى أَتَوْا الدَّيْرَ فَإِذَا هُمْ بِرَجُلٍ مُوثَقٍ شَدِيدِ الْوَثَاقِ مُظْهِرٍ الْحُزْنَ كَثِيرِ التَّشَكِّي فَسَلَّمُوا عَلَيْهِ فَرَدَّ عَلَيْهِمْ فَقَالَ مَنْ أَنْتُمْ قَالُوا مِنْ الْعَرَبِ قَالَ مَا فَعَلَتْ الْعَرَبُ أَخَرَجَ نَبِيُّهُمْ بَعْدُ قَالُوا نَعَمْ قَالَ فَمَا فَعَلَتْ الْعَرَبُ قَالُوا خَيْرًا آمَنُوا بِهِ وَصَدَّقُوهُ قَالَ ذَلِكَ خَيْرٌ لَهُمْ وَكَانَ لَهُ عَدُوٌّ فَأَظْهَرَهُ اللَّهُ عَلَيْهِمْ قَالَ فالْعَرَبُ الْيَوْمَ إِلَهُهُمْ وَاحِدٌ وَدِينُهُمْ وَاحِدٌ وَكَلِمَتُهُمْ وَاحِدَةٌ قَالُوا نَعَمْ قَالَ فَمَا فَعَلَتْ عَيْنُ زُغَرَ قَالَ قَالُوا صَالِحَةٌ يَشْرَبُ مِنْهَا أَهْلُهَا لِشَفَتِهِمْ وَيَسْقُونَ مِنْهَا زَرْعَهُمْ قَالَ فَمَا فَعَلَ نَخْلٌ بَيْنَ عَمَّانَ وَبَيْسَانَ قَالُوا صَالِحٌ يُطْعِمُ جَنَاهُ كُلَّ عَامٍ قَالَ فَمَا فَعَلَتْ بُحَيْرَةُ الطَّبَرِيَّةِ قَالُوا مَلْأَى قَالَ فَزَفَرَ ثُمَّ زَفَرَ ثُمَّ زَفَرَ ثُمَّ حَلَفَ لَوْ خَرَجْتُ مِنْ مَكَانِي هَذَا مَا تَرَكْتُ أَرْضًا مِنْ أَرْضِ اللَّهِ إِلَّا وَطِئْتُهَا غَيْرَ طَيْبَةَ لَيْسَ لِي عَلَيْهَا سُلْطَانٌ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى هَذَا انْتَهَى فَرَحِي ثَلَاثَ مَرَّاتٍ إِنَّ طَيْبَةَ الْمَدِينَةُ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ حَرَّمَ عَلَى الدَّجَّالِ أَنْ يَدْخُلَهَا ثُمَّ حَلَفَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاللَّهِ الَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ مَا لَهَا طَرِيقٌ ضَيِّقٌ وَلَا وَاسِعٌ فِي سَهْلٍ وَلَا جَبَلٍ إِلَّا عَلَيْهِ مَلَكٌ شَاهِرٌ بِالسَّيْفِ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ مَا يَسْتَطِيعُ الدَّجَّالُ أَنْ يَدْخُلَهَا عَلَى أَهْلِهَا قَالَ عَامِرٌ فَلَقِيتُ الْمُحْرَّرَ بْنَ أَبِي هُرَيْرَةَ فَحَدَّثْتُهُ بِحَدِيثِ فَاطِمَةَ بِنْتِ قَيْسٍ فَقَالَ أَشْهَدُ عَلَى أَبِي أَنَّهُ حَدَّثَنِي كَمَا حَدَّثَتْكَ فَاطِمَةُ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّهُ فِي نَحْوِ الْمَشْرِقِ قَالَ ثُمَّ لَقِيتُ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ فَذَكَرْتُ لَهُ حَدِيثَ فَاطِمَةَ فَقَالَ أَشْهَدُ عَلَى عَائِشَةَ أَنَّهَا حَدَّثَتْنِي كَمَا حَدَّثَتْكَ فَاطِمَةُ غَيْرَ أَنَّهَا قَالَتْ الْحَرَمَانِ عَلَيْهِ حَرَامٌ مَكَّةُ وَالْمَدِينَةُ

उन्होंने कहा कि 'जब मैं बाहर जाने वाला था तो उन्होंने कहा कि जब तक मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक हदीस न सुनाऊँ तब तक बैठो'। फिर उ मोसे कहिन, कि एक दिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल हाजिरा नमाज पढ़ै के लिए बाहर आए - जब दिन मा गर्मी रही -, फिर उ बैठ गें कि उनके दोस्त हैरान होइ गें, उ कहिन: 'बैठौ, हे लोग, काहे से कि मैं आपन जगह से तोहका आश्चर्यचकित करै के लिए नाहीं उठिन, बल्कि तोहका ई बतावै के लिए कि अदीम-दारी ने मुझसे एक नया बतावा रहा मोका कैलुला - एक झपकी लेवे में असमर्थ बना दिहिस - काहे से कि ई बहुत सुखद अऊर सुखदायक रहा। यहिसे मैं तोहरे पैगम्बर के सुखद खबर तोहका फैलावै चाहत हउँ। तमीम ने मोका बतावा रहा, कि उनके चाचा के वंशजन से लोगन का एक समूह रहा जवन समुद्र मा नाव चलावत रहा अऊर फिर ओनका एक तूफान आवा रहा तौ उ एक द्वीप पर फंस गा रहा जवन ओनके लिए विदेशी रहा, फिर उ द्वीप पर बाहर आवै तक एक डोंगी मा बैठा रहा, अचानक ओनका एक प्राणी मिला जेकर चेहरा बहुत खुरदुरा रहा अऊर लंबा बाल रहा तौ ई स्पष्ट नाहीं रहा कि उ एक आदमी रहा या एक औरत। तब उइ उनका अभिवादन किहिन अऊर उइ ओनके अभिवादन का जवाब दिहिन, उइ पूछिन, 'का तुम हमका एक कहानी सुनाओगे? ' उ जवाब दिहिन, 'मैं कहानी सुनावै वाला नाहीं हउँ अऊर न ही मैं तोहसे कहानी माँगत हउँ, लेकिन ई पूजा स्थल - मठ मा जा - वहाँ एक मनई है जउन सचमुच तोहसे खबर के इंतजार करत है, ऊ कहानी सुनाई अऊर तोहसे कहानी पूछी'। तब उन्होंने कहा, 'त हमने पूछा, 'तुम कौन हो? ' ऊ मनई जवाब दिहिस, 'मैं जस्साह हौं'। फिर उइ तब तक चलत रहे जब तक कि उइ पूजा स्थल पर नाहीं पहुँचे अऊर उइ एक मनई का पावा जवन जंजीर से ढँका रहा, उदास अऊर बहुत शिकायत करत रहा, फिर उइ ओका अभिवादन किहिन, अऊर उइ ओनके अभिवादन का जवाब दिहिन। ऊ मनई तब पूछिस, 'तुम कौन हौ? ' उइ जवाब दिहिन, 'हम अरब के लोग हैं'। आदमी ने फिर पूछा, 'अरब का कर रहे हैं, उनका नबी निकला है का? ' उइ जवाब दिहिन, 'हाँ'। ऊ मनई फिरि पूछिस- 'तो अरबी का किहिन? ' उइ जवाब दिहिन, 'उइ कुछ अच्छा किहिन, वहिमा विश्वास किहिन अऊर यहिके पुष्टि किहिन'। ऊ आदमी कहिस, 'ई ओनके लिए अच्छा रहा, अऊर ओनके दुश्मन रहे लेकिन अल्लाह ओनसे जीत लिहिन'। ऊ आदमी फिर पूछिस- 'का एकर मतलब ई है कि आज के अरबन के पास एक भगवान है? इनका दीन -धर्म- एक है और इनके वाक्य एक ? ' उइ जवाब दिहिन, 'हाँ'। ऊ आदमी फिर पूछिस, 'तो ऐनू जुघर - झरना का नाम - का भवा? ' उइ जवाब दिहिन, 'कुछ अच्छा भवा, लोग अपने पौधन का पीवै अऊर पानी पिलावै खातिर लइ गें'। तभी ऊ आदमी फिर पूछिस, 'तो अमन-बैसान के बीच खजूर के पेड़ का का भवा? ' उइ जवाब दिहिन, 'कुछ अच्छा होत है, यहिसे फसल हर साल पर्याप्त भोजन प्रदान कइ सकत है'। ऊ आदमी पूछिस- 'फिर बुहैरा तबरिया का का भवा? ' उइ जवाब दिहिन, 'भरा'। तमीम ने कहा, 'फिर उ साँस छोड़िन, फिर उ साँस छोड़िन अऊर फिर उ कसम खात हुए फिर से साँस छोड़िन, 'अगर मैं ई जगह छोड़ब तौ मैं निश्चित रूप से अल्लाह के धरती से एकौ धरती नाहीं छोड़ब लेकिन मैं वहिसे गुजरब, सिवाय थाईबा - मदीना शहर के नाम - मोर पास वहिके ऊपर कौनो ताकत नाहीं है''। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तीन बार कहा: 'यहीं से मोर खुशी खतम होत है।' दरअसल, मदीना शहर के अच्छाई ई अहै काहे से कि अल्लाह अज्जा वजल्ला दज्जल का वहिमा घुसय से मना कइ दिहिस है,' तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कसम खाई: 'अल्लाह के कसम, ओकरे अलावा कौनो भगवान नाहीं है जवन पूजा के लायक है, मैदान या पहाड़ी मा कौनो रास्ता नाहीं है, चाहे उ संकरी होय या चौड़ा, जब तक कि ई तलवारन से नहीं खींचा जात है पुनरुत्थान का दिन अऊर दज्जल अपने निवासियन से मिले खातिर घुस न पइहैं।' [अमीर] ने कहा, 'मैं तब [अल मुहर्र बिन अबू हुरैरा] से मिला, फिर मैंने उन्हें फातिमा बिन कैस का हदीस सुनाया, उन्होंने कहा, 'मैं [अपने पिता] के खिलाफ गवाही देता हूँ, कि उन्होंने मुझसे कहा है जैसा कि फातिमा ने आपसे कहा है, लेकिन मेरे पिता ने कहा, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ने कहा: 'दजल पूरब से प्रकट होंगे'। अमीर कहिन, 'तब हम [अल कासिम बिन मुहम्मद] से मिलेन, तब हम ओनका फातिमा के हदीस बताइन, उ कहिन, 'हम ['ऐस्या] के खिलाफ गवाही देत ​​हई, कि उ हमसे वइसने कहिन है जइसे फातिमा आपसे कहिन हैं, लेकिन ऐशा कहिन, 'दु पवित्र भूमि ओनके लिए मना अहै; मक्का अऊर मदीना'।