Batalnya wudhu: barangsiapa yang menyentuh kemaluannya, maka hendaklah dia berwudhu
Imam Ahmad : 26033
قَالَ عَبْد اللَّهِ وَجَدْتُ فِي كِتَابِ أَبِي بِخَطِّ يَدِهِ حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَزْمٍ الْأَنْصَارِيُّ أَنَّهُ سَمِعَ عُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِ يَقُولُ ذَكَرَ مَرْوَانُ فِي إِمَارَتِهِ عَلَى الْمَدِينَةِ أَنَّهُ يُتَوَضَّأُ مِنْ مَسِّ الذَّكَرِ إِذَا أَفْضَى إِلَيْهِ الرَّجُلُ بِيَدِهِ فَأَنْكَرْتُ ذَلِكَ عَلَيْهِ فَقُلْتُ لَا وُضُوءَ عَلَى مَنْ مَسَّهُ فَقَالَ مَرْوَانُ أَخْبَرَتْنِي بُسْرَةُ بِنْتُ صَفْوَانَ أَنَّهَا سَمِعَتْ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَذْكُرُ مَا يُتَوَضَّأُ مِنْهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَيُتَوَضَّأُ مِنْ مَسِّ الذَّكَرِ قَالَ عُرْوَةُ فَلَمْ أَزَلْ أُمَارِي مَرْوَانَ حَتَّى دَعَا رَجُلًا مِنْ حَرَسِهِ فَأَرْسَلَهُ إِلَى بُسْرَةَ يَسْأَلُهَا عَمَّا حَدَّثَتْ مِنْ ذَلِكَ فَأَرْسَلَتْ إِلَيْهِ بُسْرَةُ بِمِثْلِ الَّذِي حَدَّثَنِي عَنْهَا مَرْوَانُ
अब्दुल्ला कहिन; हमका अपने पिता के किताब मा उनकर खुद के लेखन मिला; हमसे कहिन है [अबू अल यामन] ने कहा, हमसे कहा है [स्यूअैब] से [अज जुहरी] ने कहा, मुझसे कहा है [अब्दुल्ला बिन अबू बकर बिन हजम अल अंसारी] कि उ [उर्वाह बिन जुबैर] का कहते सुने रहे, '[मरवान] ने मदीना पर अपने शासनकाल के दौरान उल्लेख किया था, कि अगर कोई आदमी अपने हाथ से अपने जननांग को छूता है तो उसे ओकरे बातन पर अविश्वास किहिन। हम कहेन, 'जेहिका छूवैं, वहिके वूजू नाहीं है'। तब मारवान ने कहा, '[बुसराह बिन्त शफवान] ने मोका सूचित किहिन है कि उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का ई बतावत सुनिन हैं कि एक मनई का वजू करै का का कारण बनत है। त रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'गुप्त अंगन का छूवै के लिए वजू करै के जरूरत है'। उर्वाह कहिन, 'मैं मारवान से तब तक बहस करत रहौं जब तक कि उ आपन एक पहरेदार का बुसराह से मिलै भेजिन, अऊर पूछिन कि उ का कहिन। बुसरा फिर उ जानकारी लइके वापस भेजिन जवन मारवान हमका उनसे बताइन रहैं।'