Imam Ahmad : 25953
حَدَّثَنَا يَزِيدُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مَالِكٍ قَالَ كَانَ أَبِي قَدْ صَلَّى خَلْفَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ ابْنُ سِتَّ عَشْرَةَ سَنَةً وَأَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ وَعُثْمَانَ فَقُلْتُ لَهُ أَكَانُوا يَقْنُتُونَ قَالَ لَا أَيْ بُنَيَّ مُحْدَثٌ
उ हमसे कहिन [यजीद] उ कहिन, उ हमसे [अबू मलिक] कहिन कि उ कहिन, '[मेरे पिता] रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पीछे नमाज पढ़त रहें - जब उ केवल सोलह साल के रहें-, अबू बकर, उमर अऊर उथमान के साथे। हम तब उनसे पूछेन, 'का उ लोग कुनट करत हैं?' उन्होंने जवाब दिया कि 'हे बेटवा, ई तो बनावटी बात है'।