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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 25945

حَدَّثَنَا مُؤَمَّلٌ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ يَعْنِي ابْنَ سَلَمَةَ قَالَ حَدَّثَنَا شَيْخٌ يُقَالُ لَهُ أَبُو عَمْرٍو عَنْ ابْنَةٍ لِأُهْبَانَ بْنِ صَيْفِيٍّ عَنْ أَبِيهَا وَكَانَتْ لَهُ صُحْبَةٌ أَنَّ عَلِيًّا لَمَّا قَدِمَ الْبَصْرَةَ بَعَثَ إِلَيْهِ فَقَالَ مَا يَمْنَعُكَ أَنْ تَتْبَعَنِي فَقَالَ أَوْصَانِي خَلِيلِي وَابْنُ عَمِّكَ فَقَالَ إِنَّهُ سَيَكُونُ فُرْقَةٌ وَاخْتِلَافٌ فَاكْسِرْ سَيْفَكَ وَاتَّخِذْ سَيْفًا مِنْ خَشَبٍ وَاقْعُدْ فِي بَيْتِكَ حَتَّى تَأْتِيَكَ يَدٌ خَاطِئَةٌ أَوْ مَنِيَّةٌ قَاضِيَةٌ فَفَعَلْتُ مَا أَمَرَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِنْ اسْتَطَعْتَ يَا عَلِيُّ أَنْ لَا تَكُونَ تِلْكَ الْيَدَ الْخَاطِئَةَ فَافْعَلْ حَدَّثَنَا أَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ أَبِي عَمْرٍو الْقَسْمَلِيِّ عَنْ ابْنَةِ أُهْبَانَ عَنْ أَبِيهَا أَنَّ عَلِيًّا أَتَى أُهْبَانَ فَقَالَ مَا يَمْنَعُكَ مِنْ اتِّبَاعِي فَذَكَرَ مَعْنَاهُ

उ हमसे [मुअम्मल] कहिन हैं, उ हमसे कहिन हैं [हम्मद] - अर्थात् इब्न सलामा - उ कहिन, उ हमसे शेख बताइन हैं जेका आमतौर पर [अपनी बिटिया उहबान बिन शैफी] से [उनके पिता] से [अबू अमरू] कहा जात है अऊर उ रसूलुल्लाह सल्लाहुअलाह अलैलाम के साथियन में से एक हैं, जब उ बसरह, ऊ अपने पास केहू का भेजिस -उहबान- अली कहिन, 'तुमका मोर साथ देय से का रोकत है? ' तब ऊ जवाब दिहिस, 'मेरे प्रेमी अऊर तोहार चाचा के बेटवा मोका वसीयत दिहिन हैं अऊर कहिन हैं: 'वास्तव मा विभाजन अऊर कलह होई, आपन तलवार तोड़ौ अऊर लकड़ी से बनी तलवार लइ लेव, जब तक तुम दोषी के हाथ से न मिल जाओ या मौत न आवै तब तक तुमका अपने घर मा बैठै का चाही'। तौ हम वही किहेन जवन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमका करै का आदेश दिहिन रहैं। हे 'अली, अगर तुम उ गलत हाथ मा न पड़ै में सक्षम हौ तौ करौ'। हमसे [असवाद बिन अमीर] कहिन हैं, उ कहिन, हमसे [हम्मद बिन सलामा] से [अबू अमरू अल कसमली] से अपनी बिटिया [उहबान] से [अपने पिता] से कहिन हैं कि 'अली उहबान के पास आए अऊर कहिन, 'तुमका मोर पीछे चलै से का रोकत है ... फिर उ हदीस के अर्थ बताइन'।