Imam Ahmad : 25926
حَدَّثَنَا هَاشِمٌ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مَعْشَرٍ عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُصَيْفَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا وَجَدَ أَحَدُكُمْ أَلَمًا فَلْيَضَعْ يَدَهُ حَيْثُ يَجِدُ أَلَمَهُ ثُمَّ لِيَقُلْ سَبْعَ مَرَّاتٍ أَعُوذُ بِعِزَّةِ اللَّهِ وَقُدْرَتِهِ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ
हमसे कहिन है [हसीम] ने कहा, हमसे [अबू मस्यार] से [यजीद बिन खुशैफा] से [अमरू बिन कब बिन मलिक] से [अपने पिता] से कहिन है, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अगर तुममें से कोई बीमार महसूस करत है, तो उ आपन हाथ प्रभावित क्षेत्र पर रखे अऊर फिर सात बार कहे; अ'उदज़ू बि'इज्जतिल्लाही वा कुद्रतिही अला कुल्ली स्याइ`इन मिन स्यार्री मा अजीदु -मैं हर बुराई से अल्लाह के महिमा अऊर शक्ति मा शरण लेत हउँ जेका मैं अनुभव करत हउँ-''।