Imam Ahmad : 25863
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ لَا يَقْتُلْ بَعْضُكُمْ بَعْضًا إِذَا رَمَيْتُمْ الْجَمْرَةَ فَارْمُوهَا بِمِثْلِ حَصَى الْخَذْفِ قَالَ أَبِي وَقُرِئَ عَلَيْهِ يَزِيدُ يَعْنِي ابْنَ أَبِي زِيَادٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْأَحْوَصِ عَنْ أُمِّهِ يَعْنِي عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे [सुफयान] बतावा गा है कि उ कहिन, 'हे लोग, तुममें से कुछ लोग जुमराह 'अकाबा' फेंकत समय दूसरन का मार डारिन, अऊर दुइ उंगली के बीच मा कंकड़ से फेंक दिहिन। मोर पिताजी कहिन, अऊर ई [यजीद] - अर्थात् इब्न अबू जियाद - द्वारा [सुलेमान बिन अमरू बिन अल अह्वाश] से [उनकी महतारी] से, अर्थात् पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पढ़ा गा रहा।