Imam Ahmad : 25115
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَا مِنْ نَبِيٍّ يَمْرَضُ إِلَّا خُيِّرَ بَيْنَ الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ قَالَتْ فَلَمَّا مَرِضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَرَضَ الَّذِي قُبِضَ فِيهِ أَخَذَتْهُ بُحَّةٌ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ مَعَ الَّذِينَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ مِنْ النَّبِيِّينَ وَالصِّدِّيقِينَ وَالشُّهَدَاءِ وَالصَّالِحِينَ قَالَتْ فَعَلِمْتُ أَنَّهُ خُيِّرَ
हमसे कहिन है [याकूब] कहिन; हमका [मेरे पिता] से [अपने पिता] से [उर्वाह] से [ऐस्याह] से कहिन है; हमने पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना है: 'कोऊ नबी तब तक बीमार न होई जब तक कि ओका दुनिया अऊर परलोक के बीच विकल्प न दीन जाई'। आयशा कहिन; जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बीमार रहे अऊर उ बीमारी के दौरान उनकर मृत्यु होइ गै, तौ उ रुक-रुक के बोलत रहे, हम उनका कहत सुने रहेन; "उनके साथ जिनके ऊपर तुमने एहसान किया है, जेहिमा नबी, ईमानदार लोग, शहीद अऊर धर्मी लोग शामिल हैं।" उ कहिन; 'हम जानित है कि ओका एक विकल्प दीन गा है'।