Ibadah yang dicintai Allah yaitu yang rutin walau sedikit
Imam Ahmad : 24901
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ قَالَ حَدَّثَنَا يُونُسُ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّ الْحَوْلَاءَ بِنْتَ تُوَيْتٍ مَرَّتْ عَلَى عَائِشَةَ وَعِنْدَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَذِهِ الْحَوْلَاءُ وَزَعَمُوا أَنَّهَا لَا تَنَامُ اللَّيْلَ فَقَالَ لَا تَنَامُ اللَّيْلَ خُذُوا مِنْ الْعَمَلِ مَا تُطِيقُونَ فَوَاللَّهِ لَا يَسْأَمُ اللَّهُ حَتَّى تَسْأَمُوا قَالَ أَبِي حَدَّثَنَاه وَهْبٌ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ سَمِعْتُ النُّعْمَانَ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ مَرَّتْ الْحَوْلَاءُ بِنْتُ تُوَيْتِ بْنِ حَبِيبِ بْنِ أَسَدِ بْنِ عَبْدِ الْعُزَّى فَذَكَرَهُ وَقَالَ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يَسْأَمُ حَتَّى تَسْأَمُوا حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ قَالَ عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ أَخْبَرَتْنِي عَائِشَةُ أَنَّ الْحَوْلَاءَ بِنْتَ تُوَيْتِ بْنِ حَبِيبِ بْنِ أَسَدِ بْنِ عَبْدِ الْعُزَّى فَذَكَرَ الْحَدِيثَ
हमसे [उस्मान बिन उमर] कहिन है, उ कहिन; हमका [यूनुस] से [अज़ुहरी] से [उर्वाह] से [ऐसिया] से कहिन है कि हौला बिंत तुवैत एक बार ऐसिया के सामने से गुजरिन जबकि उनके बगल मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रहे, ऐसिया कहिन; हम कहेन; 'हे अल्लाह के रसूल! ई हौला है`, लोग दावा करत हैं कि ऊ रात मा कबहूँ नाहीं सोवत है'। कहिन- 'रात मा सोय न, जौन कर्म होइ सकै करौ।' अल्लाह के कसम, जब तक तुम बोर न हो जाओ तब तक अल्लाह कभी बोर नहीं होगा'। उ कहिन; मोर पिता कहिन; हमसे [वहाब] बताइस है, उ कहिन; हमसे [मेरे पिता] कहिन हैं, उ कहिन; हम [अन्नुमान] से [अज़ुहरी] से [उरवाह] से [आइशा] से कहते सुने हई; 'हौला बिनत तुवैत बिन हबीब बिन असद बिन अब्दुल उज्जा एक बार पार होइगा'। फिर उ ई बताइस। उ बयान किहिन; 'वास्तव मा, अल्लाह तब तक बोर नाहीं होई जब तक आप बोर न होइहैं'। हमका [अबू अल यमन] बताय के बाद उ कहिन; [अज़ुहरी] से हमका [स्यु'एब] रिपोर्ट किहिन है, [उर्वाह बिन अज्जुबैर] कहिन; मोका [ऐस्याह] सूचित किहिन है कि हौला` बिनत तुवैत बिन हबीब बिन असद बिन अब्दुल उज्जा तब उ ई हदीस का जिक्र किहिन।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 8245, 22915, 22994, 23059, 23111, 23186, 23399, 23819, 24153, 24260, 24382, 24451, 24590, 24755, 24772, 24845, 24882, 24901, 24928, 25274, 25493
Imam Bukhari : 41, 1083, 1834, 5413, 5984
Imam Muslim : 1302, 1303, 1305, 1307, 1308, 1958
Imam Abu Dawud : 1161
Imam Nasa'i : 754, 1624
Imam Ibnu Majah : 4228, 4230, 4231
Imam Malik : 240