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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 24468

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ عَنِ ابْنِ طَاوُسٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ بَعْدَ التَّشَهُّدِ فِي الْعِشَاءِ الْآخِرَةِ كَلِمَاتٍ كَانَ يُعَظِّمُهُنَّ جِدًّا يَقُولُ أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ وَأَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ شَرِّ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ وَأَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَأَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ قَالَ كَانَ يُعَظِّمُهُنَّ وَيَذْكُرُهُنَّ عَنْ عَائِشَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमका [अब्दुर्राज्जाक] बताय के बाद उ कहिन; हमका [इब्नू जुरैज] [इब्न थावस] से [अपने पिता] से रिपोर्ट किहिन है कि उ कहिन; ईशा नमाज के अंतिम तस्याहुद के बाद, कई वाक्य रहे जिनकी उन्होंने बहुत तारीफ की, उन्होंने प्रार्थना की: 'अ'उद्ज़ुबिल्लाही मिन 'अदज़ाबी जहाँनम वा 'अ'उद्ज़ू बिल्लाही मिन स्यारिल मसिहिद दजजल वा अ'उद्ज़ुबिल्लाही मिन अदज्वैल क़ुबिल्लाहि FITNATIL MAHYA WA MAAMATI -मैं अल्लाह के शरण लेत हउ जहन्नाम के सजा से है अऊर मैं मसीहा दज्जल के बुराई से अल्लाह से शरण लेत हउँ, अऊर मैं कब्र के सजा से अल्लाह से शरण लेत हउँ, मैं जीवन अऊर मृत्यु के बदनामी से अल्लाह से शरण लेत हउँ-'। ऊ कहत है; 'उन्होंन बहुत महिमामंडन किहिन अऊर एकर जिक्र किहिन, पैगम्बर सल्लल्लाहु 'अलेहि व सल्लम' से ['आइशा] से।