Imam Ahmad : 24249
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنِ الْأَشْعَثِ بْنِ سُلَيْمٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّ يَهُودِيَّةً دَخَلَتْ عَلَيْهَا فَذَكَرَتْ عَذَابَ الْقَبْرِ فَقَالَتْ لَهَا أَعَاذَكِ اللَّهُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ فَسَأَلَتْ عَائِشَةُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ عَذَابِ الْقَبْرِ فَقَالَ نَعَمْ عَذَابُ الْقَبْرِ حَقٌّ قَالَتْ عَائِشَةُ فَمَا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي صَلَاةً بَعْدُ إِلَّا تَعَوَّذَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे [स्यूबाह] से [अश'थ बिन सुलैम] से [अपने पिता] से [मसरूक] से [ऐस्याह] से कहिन हैं, एक यहूदी औरत रही जे उनसे मिली अऊर कब्र के यातना के बारे मा बताइस। ऊ ओसे कहिस; 'मैं कब्र के यातना से अल्लाह का शरण लेत हौं'। तब ऐस्या ने कब्र के यातना के बारे में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया: 'हाँ, कब्र के यातना कुछ अइसन है जवन हक है'। आयशा कहिन; 'मैंने कभी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहुअलेहि वसल्लम नहीं देखा। जब तक उ कब्र के यातना से अल्लाह के शरण न ले ले तब तक नमाज पढ़ौ'।