Imam Bukhari : 687
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَامٍ قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدَةُ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ عَمْرَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي مِنْ اللَّيْلِ فِي حُجْرَتِهِ وَجِدَارُ الْحُجْرَةِ قَصِيرٌ فَرَأَى النَّاسُ شَخْصَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَامَ أُنَاسٌ يُصَلُّونَ بِصَلَاتِهِ فَأَصْبَحُوا فَتَحَدَّثُوا بِذَلِكَ فَقَامَ اللَّيْلَةَ الثَّانِيَةَ فَقَامَ مَعَهُ أُنَاسٌ يُصَلُّونَ بِصَلَاتِهِ صَنَعُوا ذَلِكَ لَيْلَتَيْنِ أَوْ ثَلَاثًا حَتَّى إِذَا كَانَ بَعْدَ ذَلِكَ جَلَسَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمْ يَخْرُجْ فَلَمَّا أَصْبَحَ ذَكَرَ ذَلِكَ النَّاسُ فَقَالَ إِنِّي خَشِيتُ أَنْ تُكْتَبَ عَلَيْكُمْ صَلَاةُ اللَّيْلِ
हमका बतावा गा है [मुहम्मद बिन सलाम] कहिन, हमका बतावा गा है ['अब्दह] से [यह्या बिन सईद अल अंसारी] से [अमरा] से [ऐस्याह] कहिन, 'एक रात रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार अपने कमरा मा नमाज पढ़िन, उ समय उनके कमरा के दीवारें बहुत ऊँची नाहीं रहीं - तौ लोग सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खड़ा अकेले प्रार्थना करत है। लोग उनके पीछे खड़े होइके प्रार्थना करत रहें, जब तक कि सुबह लोग आपस मा ई घटना के बारे मा चर्चा नाहीं करत रहें। फिर दूसरी रात उ फिर से प्रार्थना किहिन, अऊर लोग फिर से ओनके प्रार्थना मा शामिल होइ गें। उइ दुइ-तीन रात तक अइसन करत रहें जब तक कि उइ रात के बाद रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम अपने घर मा बैठि गें अऊर पिछली रात के तरह नमाज पढ़ै बाहर नाहीं गें। सुबह लोगों ने उनसे पूछताछ की, फिर उन्होंने कहा : 'मुझे डर है कि रात्रि नमाज आप पर फर्ज हो जाय'।