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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 23744

حَدَّثَنَا عَفَّانُ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ حَمَّادٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ الْأَسْوَدِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ لَمَّا مَرِضَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَخَذْتُ يَدَهُ فَجَعَلْتُ أُمِرُّهَا عَلَى صَدْرِهِ وَدَعَوْتُ بِهَذِهِ الْكَلِمَاتِ أَذْهِبْ الْبَاسَ رَبَّ النَّاسِ فَانْتَزَعَ يَدَهُ مِنْ يَدِي وَقَالَ أَسْأَلُ اللَّهَ الرَّفِيقَ الْأَعْلَى الْأَسْعَدَ

हमसे [अफ्फान] बताय के, उ कहिन; हमका [हम्मद] से [हम्मद] से [इब्राहिम] से [अल-असवाद] से [ऐस्याह] से कहिन है; 'जब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बीमार रहे, तौ हम उनकर हाथ लइके उनके छाती पर रखेन अऊर हम निम्नलिखित शब्दन से प्रार्थना किहेन; 'मुसीबत का खतम करौ, हे मानव जाति के भगवान', फिर उ आपन हाथ मोर हाथ से लिहिन अऊर कहिन: 'मैं अल्लाह अज्जावाजल्ला से प्रार्थना करत हउँ, सबसे उच्च अऊर सबसे कुलीन प्रेमी'।