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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 23538

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي بُكَيْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ الْفَضْلِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيٍّ أَبِي جَعْفَرٍ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّهَا كَانَتْ تَدَّانُ فَقِيلَ لَهَا مَا لَكِ وَلِلدَّيْنِ فَقَالَتْ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَا مِنْ عَبْدٍ كَانَتْ لَهُ نِيَّةٌ فِي أَدَاءِ دَيْنِهِ إِلَّا كَانَ لَهُ مِنْ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ عَوْنٌ فَأَنَا أَلْتَمِسُ ذَلِكَ الْعَوْنَ

हमसे [यह्या बिन अबी बुकैर] कहिन हैं, उ कहिन; हमसे [अल-कासिम बिन अल-फदल], [मुहम्मद बिन अली अबी जाफर] से, [ऐसिया] से कहिन है कि उ -'ऐस्या- कभौ-कभौ कर्जदार होत है। यहिसे ओसे कहा गा रहा; कर्ज से आपका -सम्बन्ध- का है? उ जवाब दिहिन; दरअसल, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कोई भी नौकर नाहीं है जे आपन कर्ज पूरा करै का इरादा रखत है जब तक कि अल्लाह ओकर मददगार न होय'। यहिसे हमका ई मदद मिलै के उम्मीद है।