Imam Ahmad : 23360
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا أَيْمَنُ بْنُ نَابِلٍ عَنْ أُمِّ كُلْثُومٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قِيلَ لَهُ إِنَّ فُلَانًا وَجِعٌ لَا يَطْعَمُ الطَّعَامَ قَالَ عَلَيْكُمْ بِالتَّلْبِينَةِ فَحَسُّوهُ إِيَّاهَا فَوَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ إِنَّهَا لَتَغْسِلُ بَطْنَ أَحَدِكُمْ كَمَا يَغْسِلُ أَحَدُكُمْ وَجْهَهُ بِالْمَاءِ مِنْ الْوَسَخِ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला] कहिन; हमसे [ऐमन बिन नबील], [उम्मी कुल्थुम] से, [ऐस्याह] से कहा गा है; अगर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा जात रहा, त दरअसल फलाने का पेट दर्द रहा अऊर खाना खाए का मन नाहीं करत रहा। सो बोले : 'तुमका दूध पियै का चाही, तब ऊ चखिहैं।' जेकरे हाथ मा मोर आत्मा है, दूध आप मा से एक के पेट का धो सकत है, जइसे आप मा से एक गंदगी से पानी से आपन चेहरा धोवत है'।