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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Orang yang junub sebelum fajar tetap sah puasanya

Imam Ahmad : 23249

حَدَّثَنَا أَبُو الْمُنْذِرِ إِسْمَاعِيلُ بْنُ عُمَرَ قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكٌ يَعْنِي ابْنَ أَنَسٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مَعْمَرٍ عَنْ أَبِي يُونُسَ مَوْلَى عَائِشَةَ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّ رَجُلًا سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ تُدْرِكُنِي الصَّلَاةُ وَأَنَا جُنُبٌ وَأَنَا أُرِيدُ الصِّيَامَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا تُدْرِكُنِي الصَّلَاةُ وَأَنَا جُنُبٌ وَأَنَا أُرِيدُ الصِّيَامَ فَأَغْتَسِلُ ثُمَّ أَصُومُ فَقَالَ الرَّجُلُ إِنَّا لَسْنَا مِثْلَكَ فَقَدْ غَفَرَ اللَّهُ لَكَ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ فَغَضِبَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ وَاللَّهِ إِنِّي لَأَرْجُو أَنْ أَكُونَ أَخْشَاكُمْ لِلَّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَأَعْلَمَكُمْ بِمَا أَتَّقِي

हमका बतावा गा है [अबू अल-मुंडजीर इस्माइल बिन उमर] कहिन; हमका [मलिक, अर्थात् इब्न अनस] से [अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान बिन मामर] से [अबू यूनुस, ऐसियाह के गुलाम] से [ऐसियाह] से बतावा गा है कि एक मनई रहा जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहुलैहिवासल्लम से पूछिस, उ कहिन; 'हे अल्लाह के रसूल नमाज आ गई है और मैं जुनब के हालत में हूं और रोजा रखना चाहता हूँ'। तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'नमाज आइ गै अहै अऊर मैं जुनुब के हालत मा हउँ अऊर मोर मन करत है कि मोर रोजा रखै का है, एहसे मैं नहात हउँ अऊर फिर रोजा रखत हउँ'। ऊ मनई कहिस; 'वास्तव मा हम तोहरे जइसन नाहीं हई, अल्लाह तोहरे बीते अऊर आवै वाले पापन का माफ कइ दिहिस है'। त रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम नाराज होइके कहिन: 'अल्लाह के कसम, सचमुच मैं उ व्यक्ति हउँ जे आपसे ज्यादा अल्लाह से डरत हउँ अऊर मैं उ व्यक्ति हउँ जे आपसे ज्यादा आपन धर्मनिष्ठा का जानत हउँ'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 1708, 1729, 22933, 22945, 22975, 23249, 24326, 24493, 24627, 24733, 24888, 24889, 25187, 25276, 25279, 25380, 25394, 25407, 25412, 25430, 25443, 25444, 25445, 25446, 25447, 25520
Imam Bukhari : 1791, 1795, 1796
Imam Muslim : 1864, 1865, 1866, 1867, 1868, 1869
Imam Tirmidzi : 710
Imam Nasa'i : 183
Imam Ibnu Majah : 1694
Imam Malik : 565, 566, 567
Imam Darimi : 1662