Imam Ahmad : 23203
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَمْرَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ كَانَ النَّاسُ عُمَّالَ أَنْفُسِهِمْ فَكَانُوا يَرُوحُونَ كَهَيْئَتِهِمْ فَقِيلَ لَهُمْ لَوْ اغْتَسَلْتُمْ
हमका [वाकी'] बताइस है [यह्या बिन सैद] से ['अमरा] से [ऐस्या] कहिस; "शुरुआत मा, जवन मनई काम पै जात रहें, उ जुम्मा के नमाज मा जात रहें, जइसे कि जब उ काम करत रहें, तौ ओनका फटकार लगावा जात रहा: 'अगर उ नहा लेतिन - तौ अच्छा होत'।'