Imam Ahmad : 22974
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَ سُفْيَانُ سَمِعْتُ مِنْهُ حَدِيثًا طَوِيلًا لَيْسَ أَحْفَظُهُ مِنْ أَوَّلِهِ إِلَّا قَلِيلًا دَخَلْنَا عَلَى عَائِشَةَ فَقُلْنَا يَا أُمَّ الْمُؤْمِنِينَ أَخْبِرِينَا عَنْ مَرَضِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ اشْتَكَى فَجَعَلَ يَنْفُثُ فَجَعَلْنَا نُشَبِّهُ نَفْثَهُ نَفْثَ آكِلِ الزَّبِيبِ وَكَانَ يَدُورُ عَلَى نِسَائِهِ فَلَمَّا اشْتَكَى شَكْوَاهُ اسْتَأْذَنَهُنَّ أَنَّ يَكُونَ فِي بَيْتِ عَائِشَةَ وَيَدُرْنَ عَلَيْهِ فَأَذِنَّ لَهُ فَدَخَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَ رَجُلَيْنِ مُتَّكِئًا عَلَيْهِمَا أَحَدُهُمَا عَبَّاسٌ وَرِجْلَاهُ تَخُطَّانِ فِي الْأَرْضِ قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ أَفَمَا أَخْبَرَتْكَ مَنْ الْآخَرُ قَالَ لَا قَالَ هُوَ عَلِيٌّ
हमसे [सुफयान] से [अज जुहरी] से ['उबैदुल्लाह] से ['ऐस्याह] से कहे के बाद सुफयान ने कहा: हमने उनसे एक लंबी हदीस सुनी जो हमने शुरू से नहीं याद की, सिवाय थोड़े से ही, हम ऐसियाह के निवास में घुसे, हमने कहा: हे उम्मुल मुमिनिन, हमसे अल्लाह के दुर्घटना के बारे में बताओ अलैहि वा सल्लम। आयशा कहिन: ओनका बुखार रहा अऊर उ फूंक दिहिस, हम ओनके फूंक के तुलना किशमिश खाए वाले मनई के फूंक से किहिन, उ अपनी पत्नियन के बीच बारी-बारी से काम करत रहें, जब ओनका बुखार महसूस होत रहा, तौ उ ओनसे आयशा के घरे रहे के अनुमति माँगत रहें, जबकि उ लोग बारी-बारी से ओनके पास आवत रहें, ओनका इजाजत मिली तब अल्लाह के रसूल सल्लहुलाह वल्लाह वल्लाम द्वारा कमल करत रहें। दुइ मनई, जेहिमा से एक अब्बास रहा, ओकर गोड़ जमीन पर लंगड़ा रहा। इब्न अब्बास से पूछा: का ऐसियाह ने आपसे ई नाहीं बतावा कि दूसरा व्यक्ति कौन रहा? सुफियान ने जवाब दिया: नहीं। इब्न अब्बास ने कहा: उ अली है।