Barang siapa bernadzar untuk taat kepada Allah, hendaklah ia menunaikannya. Barang siapa bernadzar untuk maksiat, janganlah ia menunaikannya
Imam Bukhari : 56
حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ زِيَادِ بْنِ عِلَاقَةَ قَالَ سَمِعْتُ جَرِيرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُيَوْمَ مَاتَ الْمُغِيرَةُ بْنُ شُعْبَةَ قَامَ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ وَقَالَ عَلَيْكُمْ بِاتِّقَاءِ اللَّهِ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَالْوَقَارِ وَالسَّكِينَةِ حَتَّى يَأْتِيَكُمْ أَمِيرٌ فَإِنَّمَا يَأْتِيكُمْ الْآنَ ثُمَّ قَالَ اسْتَعْفُوا لِأَمِيرِكُمْ فَإِنَّهُ كَانَ يُحِبُّ الْعَفْوَ ثُمَّ قَالَ أَمَّا بَعْدُ فَإِنِّي أَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْتُ أُبَايِعُكَ عَلَى الْإِسْلَامِ فَشَرَطَ عَلَيَّ وَالنُّصْحِ لِكُلِّ مُسْلِمٍ فَبَايَعْتُهُ عَلَى هَذَا وَرَبِّ هَذَا الْمَسْجِدِ إِنِّي لَنَاصِحٌ لَكُمْ ثُمَّ اسْتَغْفَرَ وَنَزَلَ
हमसे [अबू अन नुमान] कहिन, हमसे [अबू अवाना] [जियाद बिन अलकाह] से कहिन; हम [जरीर बिन अब्दुल्लाह] का कहत सुने रहेन कि जब अल मुघिराह बिन स्यूबाह मर गें, खड़े होके उ अल्लाह के स्तुति किहिन अऊर ओनका पवित्र किहिन, कहिन: 'तुमरे लिए एकमा अल्लाह से डरब अऊर ओनके साथ कुछौ न जोड़ब, अऊर पूर्ण अधीनता अऊर शांति के साथ जब तक कि एक प्रतिस्थापन नेता न आवै, अऊर अब एक उत्तराधिकारी न आवै,' तब उ कहिन: 'अल्लाह तहुअला से माफी मांगो'। आपके नेता - अल मुघिरा - के लिए, काहे से कि उ माफ करब पसंद करत है'। फिर कहिन: 'अम्मा बदु, बेशक मैं पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गय रहौं तब मैं कहिन: 'मैं तोहका इस्लाम से निष्ठा देत हउँ'। तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शर्तें दीं और हर मुसलमान को सलाह दी, तो मैंने उस बात के लिए उनसे बेफादारी की, और इस मस्जिद के मालिक के खातिर, मैं हमेशा आपको सलाह देब' फिर उ इस्तिघर बनाइन अऊर मंच से उतरे।