Imam Ahmad : 22525
حَدَّثَنَا يُونُسُ حَدَّثَنَا لَيْثٌ عَنْ يَزِيدَ عَنْ عَمْرٍو مَوْلَى الْمُطَّلِبِ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُمَرَ بْنِ قَتَادَةَ عَنْ مَحْمُودِ بْنِ لَبِيدٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا أَحَبَّ اللَّهُ قَوْمًا ابْتَلَاهُمْ فَمَنْ صَبَرَ فَلَهُ الصَّبْرُ وَمَنْ جَزِعَ فَلَهُ الْجَزَعُ
हमसे कहिन है [यूनुस] हमसे [लैट्स] से [यजीद] से [अमरू, अल मुथल्लिब के दास] से [अशिम बिन उमर बिन कतादह] से [महमूद बिन लबीद] से कहिन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में, अल्लाह वल्लाह वल्लाह, जब उ लोगन से प्यार करत है, त हेस जे धैर्य रखत है, काहे से कि उ धैर्य है अऊर जे शिकायत करत है अगर ऊ शिकायत करत है, तौ ऊ शिकायत करत है।"