Imam Ahmad : 22512
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ هِشَامٍ الدَّسْتُوَائِيِّ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ يَعِيشَ بْنِ طِخْفَةَ الْغِفَارِيِّ قَالَ كَانَ أَبِي مِنْ أَصْحَابِ الصُّفَّةِ فَأَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِهِمْ فَجَعَلَ يَنْقَلِبُ الرَّجُلُ بِالرَّجُلِ وَالرَّجُلَيْنِ حَتَّى بَقِيتُ خَامِسَ خَمْسَةٍ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ انْطَلِقُوا فَانْطَلَقْنَا مَعَهُ إِلَى بَيْتِ عَائِشَةَ فَقَالَ يَا عَائِشَةُ أَطْعِمِينَا فَجَاءَتْ بِحَشِيشَةٍ فَأَكَلْنَا ثُمَّ جَاءَتْ بِحَيْسَةٍ مِثْلِ الْقَطَاةِ فَأَكَلْنَا ثُمَّ قَالَ يَا عَائِشَةُ اسْقِينَا فَجَاءَتْ بِعُسٍّ فَشَرِبْنَا ثُمَّ جَاءَتْ بِقَدَحٍ صَغِيرٍ فِيهِ لَبَنٌ فَشَرِبْنَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنْ شِئْتُمْ بِتُّمْ وَإِنْ شِئْتُمْ انْطَلَقْتُمْ إِلَى الْمَسْجِدِ فَقُلْنَا لَا بَلْ نَنْطَلِقُ إِلَى الْمَسْجِدِ قَالَ فَبَيْنَا أَنَا فِي الْمَسْجِدِ مُضْطَجِعًا عَلَى بَطْنِي إِذَا رَجُلٌ يُحَرِّكُنِي بِرِجْلِهِ فَقَالَ إِنَّ هَذِهِ ضِجْعَةٌ يَبْغَضُهَا اللَّهُ فَنَظَرْتُ فَإِذَا هُوَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدَّثَنَا هَاشِمٌ يَعْنِي ابْنَ الْقَاسِمِ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ يَعْنِي شَيْبَانَ عَنْ يَحْيَى يَعْنِي ابْنَ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ قَالَ أَخْبَرَنِي يَعِيشُ بْنُ قَيْسِ بْنِ طِخْفَةَ عَنْ أَبِيهِ وَكَانَ أَبُوهُ مِنْ أَهْلِ الصُّفَّةِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا فُلَانُ انْطَلِقْ بِهَذَا مَعَكَ وَذَكَرَ مَعْنَاهُ
हमका बतावा गा है कि [इस्माइल बिन इब्राहिम] से [हिस्याम अद दुस्तुवा`ई] से [याह्या बिन अबू कत्सिर] से [अबू सलामा] से [याईसी बिन तिखफा अल घिफारी] कहिन: [मेरे पिता] मस्जिद के कोने के कब्जा वालेन में से एक रहे फिर रसूलुल्लाह अलैह वल्लाम ने ओनका हर एक व्यक्ति बनावै का आदेश दिहिन एक या दुई मनई के साथे चारों ओर जब तक कि ओनमा से केवल एक पांचवां हिस्सा बच गवा अऊर फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'जाओ'। हम उनके साथ ऐशियाह के घर गए, उन्होंने कहा: 'हे ऐस्याह! हमका कुछ खाना दइ द्या'। उ ताजी सब्जी लाए फिर हम खाये, उ चिरई के तरह सूप लाए, हम खाये तब उ कहिन: 'हे ऐस्याह! हमका एक पेय दइ द्या'। उ एक बड़ा बर्तन लइ आए अऊर ओकरे बाद उ दूध से भरा एक छोट गिलास लइ आए, हम पिया तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'अगर आप रात भर रुके के चाहत हई, त प्लीज अऊर अगर आप मस्जिद जाय के चाहत हई, त प्लीज'। हम कहेन: हम मस्जिद जइबै। ठिखफाह ने कहा: जब मैं मस्जिद में रहा, तो मैं मुँह के नीचे सो रहा था, तब किसी ने मुझे अपने पैरों से हिलाया, उन्होंने कहा: 'यह मुँह के नीचे है जो अल्लाह से नफरत है'। हम देखेन कि उ रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रहे। हमसे कहिन है [हसीम बिन अल कासिम] हमसे कहिन है [अबू मुआविया स्याबान] से [यह्या बिन अबू कत्सिर] से [अबू सलामा] कहिन: हमका [याईसी बिन कैस बिन ठिखफाह] से [अपने पिता] से बताइन हैं अऊर उनकर पिता मस्जिद के कोने मा रहय वालेन में से एक रहे, कहिन: रसूलुल्लाह वल्लाह सल्लाहुलाहुलाह सल्लाहुलाह ने कहा: अऊर वइसने! यहिके साथ जा'। फिर उ हदीस के मतलब बताइन।