Imam Ahmad : 22436
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعْبَةَ حَدَّثَنِي سِمَاكٌ عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا أَكَلَ طَعَامًا بَعَثَ بِفَضْلِهِ إِلَى أَبِي أَيُّوبَ قَالَ فَأُتِيَ يَوْمًا بِقَصْعَةٍ فِيهَا ثُومٌ فَبَعَثَ بِهَا قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَحَرَامٌ هُوَ قَالَ لَا وَلَكِنِّي أَكْرَهُ رِيحَهُ قَالَ فَإِنِّي أَكْرَهُ مَا تَكْرَهُ
हमका [यह्या बिन सईद] [स्यूबाह] से बतावा गा है हमका [सुनौ] [जाबीर बिन समुराह] से [अबू अय्यूब अल अंसारी] से बतावा गा है कि जब रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम का खाना दीन गा रहा, तौ उ बाकी का अबू अय्यूब अल अंसारी का भेजिन, एक दिन उनका लहसुन मा खाना दीन गा रहा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम ने अबू अय्यूब अल अंसारी के पास भेजा, उ आके कहिन; ओ! का ई हराम है? रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि व सलाम ने कहा: 'नहीं, लेकिन मुझे गंध से नफरत है'। कहेन; हमका नफरत है जवन तुम नफरत करत हौ।