Imam Ahmad : 22203
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ صَالِحٍ يَعْنِي ابْنَ كَيْسَانَ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ قَالَ قَالَ أَبُو إِدْرِيسَ عَائِذُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْخَوْلَانِيُّ سَمِعْتُ حُذَيْفَةَ بْنَ الْيَمَانِ يَقُولُ وَاللَّهِ إِنِّي لَأَعْلَمُ النَّاسِ بِكُلِّ فِتْنَةٍ هِيَ كَائِنَةٌ فِيمَا بَيْنِي وَبَيْنَ السَّاعَةِ وَمَا ذَلِكَ أَنْ يَكُونَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدَّثَنِي مِنْ ذَلِكَ شَيْئًا أَسَرَّهُ إِلَيَّ لَمْ يَكُنْ حَدَّثَ بِهِ غَيْرِي وَلَكِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَهُوَ يُحَدِّثُ مَجْلِسًا أَنَا فِيهِ سُئِلَ عَنْ الْفِتَنِ وَهُوَ يَعُدُّ الْفِتَنَ فِيهِنَّ ثَلَاثٌ لَا يَذَرْنَ شَيْئًا مِنْهُنَّ كَرِيَاحِ الصَّيْفِ مِنْهَا صِغَارٌ وَمِنْهَا كِبَارٌ قَالَ حُذَيْفَةُ فَذَهَبَ أُولَئِكَ الرَّهْطُ كُلُّهُمْ غَيْرِي حَدَّثَنَا فَزَارَةُ بْنُ عَمْرٍو حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ كَيْسَانَ فَذَكَرَ مِثْلَهُ
हमसे कहिन है [याकूब] हमसे [मेरे पिता] से [सलीह बिन कैसान] से [इब्न शिहाब] कहिन हैं: कहिन [अबू इदरीस अ`इदज़ुल्लाह बिन अब्दुल्लाह अल खौलानी]: हम [हुजैफा बिन अल यमान] का कहत सुने रहेन; अल्लाह के कसम, मैं उ व्यक्ति हउँ जे मोर अऊर दुनिया के अंत के बीच होए वाली बदनामी के बारे मा सबसे अच्छा जानत हउँ, ई एहसे अहै काहे से कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाह अलैहि व सलाम ने मोका यहिके बारे मा कुछौ नाहीं बतावा रहा, लेकिन उ इका दूसर लोगन से गुप्त रखिन। बस रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम ने कहा - उन्होंने सभा के सामने कहानी सुनाई और मैं वहीं रहा - उनसे तरह तरह के बदनामी के बारे में पूछा गया, उन्होंने तरह तरह के बदनामी का जिक्र किया, जिनमें से तीन प्रकार के होते हैं जो कुछ भी नही जाने देते चाहे बड़ा हो या छोटा। गर्मी मा हवा के तरह। हुजैफा बिन अल यामन ने कहा: फिर उइ मोरे अलावा चले गें। हमसे कहिन [फजारा बिन अमरू] हमसे कहिन हैं [इब्राहिम बिन साद] हमसे कहिन हैं [सालिह बिन कैसान] उ एक समान इतिहास का जिक्र किहिन हैं।