Imam Ahmad : 21864
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا بَشِيرُ بْنُ الْمُهَاجِرِ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ كُنْتُ جَالِسًا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ جَاءَهُ رَجُلٌ يُقَالُ لَهُ مَاعِزُ بْنُ مَالِكٍ فَقَالَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ إِنِّي قَدْ زَنَيْتُ وَأَنَا أُرِيدُ أَنْ تُطَهِّرَنِي فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ارْجِعْ فَلَمَّا كَانَ مِنْ الْغَدِ أَتَاهُ أَيْضًا فَاعْتَرَفَ عِنْدَهُ بِالزِّنَا فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ارْجِعْ ثُمَّ أَرْسَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى قَوْمِهِ فَسَأَلَهُمْ عَنْهُ فَقَالَ لَهُمْ مَا تَعْلَمُونَ مِنْ مَاعِزِ بْنِ مَالِكٍ الْأَسْلَمِيِّ هَلْ تَرَوْنَ بِهِ بَأْسًا أَوْ تُنْكِرُونَ مِنْ عَقْلِهِ شَيْئَا قَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ مَا نَرَى بِهِ بَأْسًا وَمَا نُنْكِرُ مِنْ عَقْلِهِ شَيْئًا ثُمَّ عَادَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الثَّالِثَةَ فَاعْتَرَفَ عِنْدَهُ بِالزِّنَا أَيْضًا فَقَالَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ طَهِّرْنِي فَأَرْسَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى قَوْمِهِ أَيْضًا فَسَأَلَهُمْ عَنْهُ فَقَالُوا لَهُ كَمَا قَالُوا لَهُ الْمَرَّةَ الْأُولَى مَا نَرَى بِهِ بَأْسًا وَمَا نُنْكِرُ مِنْ عَقْلِهِ شَيْئًا ثُمَّ رَجَعَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الرَّابِعَةَ أَيْضًا فَاعْتَرَفَ عِنْدَهُ بِالزِّنَا فَأَمَرَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَحَفَرْنَا لَهُ حُفْرَةً فَجُعِلَ فِيهَا إِلَى صَدْرِهِ ثُمَّ أَمَرَ النَّاسَ أَنْ يَرْجُمُوهُ وَقَالَ بُرَيْدَةُ كُنَّا نَتَحَدَّثُ أَصْحَابَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَنَا أَنَّ مَاعِزَ بْنَ مَالِكٍ لَوْ جَلَسَ فِي رَحْلِهِ بَعْدَ اعْتِرَافِهِ ثَلَاثَ مِرَارٍ لَمْ يَطْلُبْهُ وَإِنَّمَا رَجَمَهُ عِنْدَ الرَّابِعَةِ
हमसे कहिस है [अबू नूआइम] हमसे कहिस है [बसीर बिन अल मुहाजिर] हमसे कहिस है [अब्दुल्लाह बिन बुरैदा] से [उनके पिता] ने कहा: मैं पैगम्बर सल्लल्लाहुअलेहिवासल्लम के पास बैठा रहा, अचानक माइज बिन मलिक नामक कोई उनके पास आया और बोला: हे अल्लाह के पैगम्बर! हम व्यभिचार किहे हई अऊर हम सचमुच चाहित है कि तू हमका शुद्ध करा। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा: 'वापस जाओ'। अगले दिन, उ फिर से पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आवा, फिर पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने स्वीकार किहिन कि उ व्यभिचार किहिन हैं, पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओनसे कहिन: 'वापस जा'। तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने लोगन के पास दूत भेजे और उनसे इस बारे में पूछा। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: 'तुम माइज़ बिन मलिक अल असलमी से का जानत हौ, का तुम ओनमा कौनो अनियमितता देखत हौ या तुम ओनके बुद्धि से इनकार करत हौ?' उइ कहिन: हम ओमा कौनो गलती नाहीं देखित है अऊर हम ओकर बुद्धिमत्ता से इनकार नाहीं करत हैं। माइज़ तीसरी बार पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलने लौटे, उन्होंने उनके सामने स्वीकार किया कि उन्होंने व्यभिचार किया है, उन्होंने कहा: हे अल्लाह के पैगम्बर! मोका शुद्ध करा। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने लोगन के पास एक अउर दूत भेजिन अऊर उनसे पूछिन, उ लोग वइसने जवाब दिहिन जइसे उ पहिली बार कहिन रहैं। ऊ चौथी बार पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास लौटि के कबूल किहिन कि हम उनके सामने व्यभिचार किहिन, फिर उ पत्थरबाजी करै का आदेश दिहिन, हम उनके छाती तक एक छेद भी बनाइन, वहिके बाद उ लोगन का पत्थर मारय का आदेश दिहिन। बुरैदा ने कहा: हमने अपने बीच पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियन के बारे मा चर्चा कीन्हेनि जे कहिन कि अगर माइज़ बिन मलिक तीन बार कबूल करै के बाद उनके वाहन मा बैठ जातिन तौ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओनका सजा नाइ देतिन, चौथे कबूल मा पत्थर मार देतिन।