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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 21114

حَدَّثَنَا عَبْد اللَّهِ حَدَّثَنِي أَبِي حَدَّثَنَا حُسَيْنُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مَعْشَرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ قَيْسٍ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ عَنْ مُعَاذٍ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَأْثُرُ عَنْ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ قَالَ وَجَبَتْ مَحَبَّتِي لِلَّذِينَ يَتَحَابُّونَ فِيَّ وَيَتَجَالَسُونَ فِيَّ وَيَتَبَاذَلُونَ فِيَّ

हमसे कहिस है 'अब्दुल्ला ने मोहि मोर बाप बताइस है। हमसे कहिस है [हुसैन बिन मुहम्मद] हमसे [अबू मस्यार] से [मुहम्मद बिन क्वॉइस] से [अबू इदरीस अल खौलानी] से [मुआज़ बिन जबल] से रसूलुल्लाह शल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम से कहिस है, उ अल्लाह अज्जावाजल्ला से रिवायित किहिन, उ कहिन; 'मेरा प्यार उन लोगन के लिए अनिवार्य है जे मोरे कारण एक दूसरे से प्यार करत हैं, मोरे कारण एक दूसरे से दोस्ती करत हैं अऊर मोरे कारण एक दूसरे का बलिदान देत हैं'।