Imam Ahmad : 19483
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَأَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَا حَدَّثَنَا عُيَيْنَةُ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي بَكْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ قَتَلَ مُعَاهَدًا فِي غَيْرِ كُنْهِهِ حَرَّمَ اللَّهُ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ قَالَ أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ كُنْهُهُ حَقٌّ
हमसे [वाकी'] अऊर [अबू अब्दुर्रहमान] कहिन हैं, दुइनौ कहिन; हमका ['उयैना] से [अपने पिता] से [अबू बकराह] से सुनावा है, उ कहिन कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'जो भी मुअहद काफिर का अइसन तरीका से मारत है जवन उचित नाहीं है, तब अल्लाह ओका जन्नत से मना कर देई'। अबू अब्दिरहमान कहिन; 'कुन्हु' शब्द सही है'।