Imam Ahmad : 19049
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ أَخْبَرَنَا الْجُرَيْرِيُّ عَنْ أَبِي الْعَلَاءِ بْنِ الشِّخِّيرِ عَنْ مُطَرِّفٍ قَالَ قَالَ لِي عِمْرَانُ إِنِّي لَأُحَدِّثُكَ بِالْحَدِيثِ الْيَوْمَ لِيَنْفَعَكَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ بِهِ بَعْدَ الْيَوْمِ اعْلَمْ أَنَّ خَيْرَ عِبَادِ اللَّهِ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَوْمَ الْقِيَامَةِ الْحَمَّادُونَ وَاعْلَمْ أَنَّهُ لَنْ تَزَالَ طَائِفَةٌ مِنْ أَهْلِ الْإِسْلَامِ يُقَاتِلُونَ عَلَى الْحَقِّ ظَاهِرِينَ عَلَى مَنْ نَاوَأَهُمْ حَتَّى يُقَاتِلُوا الدَّجَّالَ وَاعْلَمْ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ أَعْمَرَ مِنْ أَهْلِهِ فِي الْعَشْرِ فَلَمْ تَنْزِلْ آيَةٌ تَنْسَخُ ذَلِكَ وَلَمْ يَنْهَ عَنْهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى مَضَى لِوَجْهِهِ ارْتَأَى كُلُّ امْرِئٍ بَعْدَمَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَرْتَئِيَ
हमरा सब के कहलक अछि [इस्माइल] हमरा सब के [अल जुरैरी] के [अबुल अल 'अला` बिन शिखखिर] स [मुथरीफ] स कहलक अछि ओ कहलनि; [इमरान] हमरा कहलनि; सचमुच, हम आइ अहाँ सब के एकटा हदीस कहब, जाहि स आबै वाला दिन में अल्लाह अज्जा व जल्ला के फायदा होयत, याद राखब जे क़यामत के दिन अल्लाह तबराका व तआला के सबस नीक सेवक मुहम्मद के लोक छैथ, आ याद राखब जे इस्लामी धर्म के लोक के एकटा समूह हमेशा रहत जे हमेशा सच्चाई के रक्षा के लेल लड़त आ सदिखन अपन दुश्मन स ओकरा जीतत जाबे तक ओ दज्जाल के मारय में सफल नै भ जायत। आ ई जानि लिअ जे एक बेर अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन परिवारक संग दस दिन धरि उमरा केने छलाह, आ कोनो एहन आयत नहि छल जे एकरा समाप्त क' देलक वा मना क' देलक, जाबत धरि ई बीति नहि गेल जखन लोक अल्लाह केर इच्छा नहि देखलक'।