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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 18684

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا الثَّوْرِيُّ عَنْ قَيْسِ بْنِ مُسْلِمٍ عَنْ طَارِقِ بْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ قَالَ بَعَثَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى أَرْضِ قَوْمِي فَلَمَّا حَضَرَ الْحَجُّ حَجَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَحَجَجْتُ فَقَدِمْتُ عَلَيْهِ وَهُوَ نَازِلٌ بِالْأَبْطَحِ فَقَالَ لِي بِمَ أَهْلَلْتَ يَا عَبْدَ اللَّهِ بْنَ قَيْسٍ قَالَ قُلْتُ لَبَّيْكَ بِحَجٍّ كَحَجِّ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَحْسَنْتَ ثُمَّ قَالَ هَلْ سُقْتَ هَدْيًا فَقُلْتُ مَا فَعَلْتُ فَقَالَ لِي اذْهَبْ فَطُفْ بِالْبَيْتِ وَبَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ ثُمَّ احْلِلْ فَانْطَلَقْتُ فَفَعَلْتُ مَا أَمَرَنِي وَأَتَيْتُ امْرَأَةً مِنْ قَوْمِي فَغَسَلَتْ رَأْسِي بِالْخِطْمِيِّ وَفَلَّتْهُ ثُمَّ أَهْلَلْتُ بِالْحَجِّ يَوْمَ التَّرْوِيَةِ فَمَا زِلْتُ أُفْتِي النَّاسَ بِالَّذِي أَمَرَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى تُوُفِّيَ ثُمَّ زَمَنَ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ ثُمَّ زَمَنَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ فَبَيْنَا أَنَا قَائِمٌ عِنْدَ الْحَجَرِ الْأَسْوَدِ أَوْ الْمَقَامِ أُفْتِ النَّاسَ بِالَّذِي أَمَرَنِي بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ أَتَانِي رَجُلٌ فَسَارَّنِي فَقَالَ لَا تَعْجَلْ بِفُتْيَاكَ فَإِنَّ أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ قَدْ أَحْدَثَ فِي الْمَنَاسِكِ شَيْئًا فَقُلْتُ أَيُّهَا النَّاسُ مَنْ كُنَّا أَفْتَيْنَاهُ فِي الْمَنَاسِكِ شَيْئًا فَلْيَتَّئِدْ فَإِنَّ أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ قَادِمٌ فَبِهِ فَأْتَمُّوا قَالَ فَقَدِمَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ فَقُلْتُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ هَلْ أَحْدَثْتَ فِي الْمَنَاسِكِ شَيْئًا قَالَ نَعَمْ أَنْ نَأْخُذَ بِكِتَابِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَإِنَّهُ يَأْمُرُ بِالتَّمَامِ وَأَنْ نَأْخُذَ بِسُنَّةِ نَبِيِّنَا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِنَّهُ لَمْ يَحْلِلْ حَتَّى نَحَرَ الْهَدْيَ

हमसे कहिन है [अब्दुर्राजाक] हमसे [अत्स त्सौरी] से [कैस बिन मुस्लिम] से [थारिक बिन सिहाब] से [अबू मूसा अल अस्यारी] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मोका अपने लोगन के लिए -एक प्रचारक बनय के लिए भेजा। जबै हज का मौसम आवा तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हज करै गे रहै अउर मैं भी हज करै गयेंव। जब उ अबथाह मा आराम करत रहें तौ हम उनसे मिलेन, अऊर उ हमसे पूछिन: 'हे अब्दुल्लाह बिन कैस, आप इहलाल - हज मा प्रवेश करै के आपन इरादा - का पढ़ाई से कहत हईं?' हम जवाब दिहेन, 'लब्बैका बिहाज्जिन का हज्जी रसुउलिल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम -हे अल्लाह, मैं रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हज के तरह हज अंजाम देय के लिए आपके आह्वान का स्वागत करत हई-'। ऊ कहिस: 'अच्छा!' फिर उ फिर से पूछिन: 'का तुम हड्यू जानवर - हज के लिए विशेष रूप से बलि के जानवर - लाये रहेव? हम जवाब दिहेन: नाहीं, हम नाहीं लाये रहेन। फिर उन्होंने मुझसे कहा: 'जा, काबा में तवाफ कर फिर शफा और मरवाह के बीच साई कर फिर तहल्लुल्लाह हो! तो मैं जाके वही किहेव जवन बतावा गा रहा, फिर अपने लोगन के एक औरत से मुलाकात भै अऊर उ शैम्पू से मोर बाल धोइस, फिर मैं तरवीया के दिन हज करै के ताई हज किहेव। अऊर हम हमेशा फतवा देत रहेन - सवालन के जवाब देत रहेन - लोगन का जवन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमका करै का आदेश दिहिन रहैं, जब तक कि बाद मा अबू बकर रदलियाहु अन्हू के समय मा भी उ मरि गें। फिर उमर रदलियाअल्लाहू अन्हू के समय, जब मैं काला पत्थर या मकाम इब्राहिम के पास खड़ा रहा, अऊर मैं लोगन का फतवा देत रहा, जवन रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने मोका करै का आदेश दिहिन रहा, तब केहू मोर पास आवा, उ मोसे फुसफुसाइस, अऊर कहिस: 'अपने नेता के साथ जल्दबाजी न करौ, काहे से कि ईमानदारन के पास ई नीति के बारे मा एक नया नीति है अनुष्ठान'। तब हमने कहा: हे लोग जो कि हमने जो फतवा दिया है उसका अंजाम दिया है, वह स्थगित कर दे काहे से कि मुमिनों का नेता हज अंजाम देने आया है, फिर उसे सिद्ध कराओ! -कथाकार ने कहा - तब उमर रदलियाल्लाहु अन्हू आए, और मैंने उनसे कहा: हे अमीरुल मुकमिनिन, इस हज संस्कार में आपकी कोई नई नीति है? उ जवाब दिहिन; हाँ, यानी हम अल्लाह अज्जा वजल्ला के किताब से लेत हैं, काहे से कि उ हमका हज पूरा करै का आदेश दिहिन हैं। अऊर हम अपने पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सुन्नत से भी लेत हैं, काहे से कि जब तक उ हड्यू का वध नाहीं किहिन तब तक उ पश्चाताप नाहीं किहिन।