Imam Bukhari : 645
حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ أَسَدٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي مَحْمُودُ بْنُ الرَّبِيعِ قَالَ سَمِعْتُ عِتْبَانَ بْنَ مَالِكٍ الْأَنْصارِيَّ قَالَاسْتَأْذَنَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَذِنْتُ لَهُ فَقَالَ أَيْنَ تُحِبُّ أَنْ أُصَلِّيَ مِنْ بَيْتِكَ فَأَشَرْتُ لَهُ إِلَى الْمَكَانِ الَّذِي أُحِبُّ فَقَامَ وَصَفَفْنَا خَلْفَهُ ثُمَّ سَلَّمَ وَسَلَّمْنَا
हमसे कहिस है [मुआदज बिन असद] हमसे कहिस है [अब्दुल्ला] हमसे कहिस है [मामर] से [अज जुहरी] कहिन, हमसे कहिन है [महमूद बिन अर रबी'] कहिन, 'मैंने ['इतबान बिन मलिक अल अंसारी] का कहते सुना है, 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मेरे घर में घुसे के अनुमति माँगी, मैंने इजाजत दी। फिर उ कहिन: 'तुम अपने घर से कौन सी जगह पसंद करत हौ ताकि मैं वहिके पास प्रार्थना कर सकौं?' तौ हम एक अइसन जगह का इशारा किहेन जवन हमका पसंद रहा। फिर उ प्रार्थना करै के लिए खड़ा भवा अऊर हम उनके पीछे लाइन मा खड़ा होइ गयेन, उनका अभिवादन करै के बाद हम उनका अभिवादन किहिन।'