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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 18633

حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَخْبَرَنَا عُثْمَانُ بْنُ حَكِيمٍ الْأَنْصَارِيُّ عَنْ خَارِجَةَ بْنِ زَيْدٍ عَنْ عَمِّهِ يَزِيدَ بْنِ ثَابِتٍ قَالَ خَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمَّا وَرَدْنَا الْبَقِيعَ إِذَا هُوَ بِقَبْرٍ جَدِيدٍ فَسَأَلَ عَنْهُ فَقِيلَ فُلَانَةُ فَعَرَفَهَا فَقَالَ أَلَا آذَنْتُمُونِي بِهَا قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ كُنْتَ قَائِلًا صَائِمًا فَكَرِهْنَا أَنْ نُؤْذِنَكَ فَقَالَ لَا تَفْعَلُوا لَا يَمُوتَنَّ فِيكُمْ مَيِّتٌ مَا كُنْتُ بَيْنَ أَظْهُرِكُمْ أَلَا آذَنْتُمُونِي بِهِ فَإِنَّ صَلَاتِي عَلَيْهِ لَهُ رَحْمَةٌ قَالَ ثُمَّ أَتَى الْقَبْرَ فَصَفَّنَا خَلْفَهُ وَكَبَّرَ عَلَيْهِ أَرْبَعًا

हमसे कहिन है [हुसैम] हमसे [उथमान बिन हकीम अल अंसारी] [खरीजा बिन जैद] से [अपने चाचा] अर्थात् यजीद बिन थाबित से कहिन हैं, उ कहिन; हम एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ बाहर गये थे, जब हम बकीआ के पास से गुजरे तो उन्होंने एक नई कब्र देखी, तो उन्होंने उसके बारे में पूछा। फिर ओका बतावा गा कि ई फुलाना है, अऊर उ जाहिर तौर पर ओका जानत रहा। त उ कहिन: 'तुम मोका -उनके मउत के बारे मा- काहे नाहीं बतावा?' साथियन ने जवाब दिया, 'हे रसूल्लाह, उ समय तुम कैलुलाह- झपकी लेत रहेव- अऊर रोजा रखत रहेव, एहसे हम तोहका बतावै मा संकोच करत रहे'। उ कहिन: 'अइसन न होइ। अउर जब तक हम तोहरे बीच मा रहब तब तलक तोहरे बीच मा से एकौ का मरै न देइ, अउर फिर तू मोका न बताइ। काहे से कि ओकरे ऊपर मोर प्रार्थना एक दया है'। आखिर कब्र पर आइन और हमका अपने पीछे लाइन लगाय दिहिन, फिर चार तकबीर से तकबीर करिन।