Imam Ahmad : 18602
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَاصِمٍ أَخْبَرَنَا الْهَجَرِيُّ قَالَ خَرَجْتُ فِي جِنَازَةِ بِنْتِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي أَوْفَى وَهُوَ عَلَى بَغْلَةٍ لَهُ حَوَّاءَ يَعْنِي سَوْدَاءَ قَالَ فَجَعَلَ النِّسَاءُ يَقُلْنَ لِقَائِدِهِ قَدِّمْهُ أَمَامَ الْجِنَازَةِ فَفَعَلَ قَالَ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ لَهُ أَيْنَ الْجِنَازَةُ قَالَ فَقَالَ خَلْفَكَ قَالَ فَفَعَلَ ذَلِكَ مَرَّةً أَوْ مَرَّتَيْنِ ثُمَّ قَالَ أَلَمْ أَنْهَكَ أَنْ تُقَدِّمَنِي أَمَامَ الْجِنَازَةِ قَالَ فَسَمِعَ امْرَأَةً تَلْتَدِمُ وَقَالَ مَرَّةً تَرْثِي فَقَالَ مَهْ أَلَمْ أَنْهَكُنَّ عَنْ هَذَا إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَنْهَى عَنْ الْمَرَاثِي لِتُفِضْ إِحْدَاكُنَّ مِنْ عَبْرَتِهَا مَا شَاءَتْ فَلَمَّا وُضِعَتْ الْجِنَازَةُ تَقَدَّمَ فَكَبَّرَ عَلَيْهَا أَرْبَعَ تَكْبِيرَاتٍ ثُمَّ قَامَ هُنَيْهَةً فَسَبَّحَ بِهِ بَعْضُ الْقَوْمِ فَانْفَتَلَ فَقَالَ أَكُنْتُمْ تَرَوْنَ أَنِّي أُكَبِّرُ الْخَامِسَةَ قَالُوا نَعَمْ قَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا كَبَّرَ الرَّابِعَةَ قَامَ هُنَيَّةً فَلَمَّا وُضِعَتْ الْجِنَازَةُ جَلَسَ وَجَلَسْنَا إِلَيْهِ فَسُئِلَ عَنْ لُحُومِ الْحُمُرِ الْأَهْلِيَّةِ فَقَالَ تَلَقَّانَا يَوْمَ خَيْبَرَ حُمُرٌ أَهْلِيَّةٌ خَارِجًا مِنْ الْقَرْيَةِ فَوَقَعَ النَّاسُ فِيهَا فَذَبَحُوهَا فَإِنَّ الْقُدُورَ لَتَغْلِي بِبَعْضِهَا إِذْ نَادَى مُنَادِي رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَهْرِيقُوهَا فَأَهْرَقْنَاهَا وَرَأَيْتُ عَلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي أَوْفَى مِطْرَفًا مِنْ خَزٍّ أَخْضَرَ
हमसे कहिन [अली बिन अशिम] हमसे कहिन हैं [अल हजारी] उ कहिन; मैं अब्दुल्ला बिन अबू औफा के बिटिया के लाश के साथे निकला, जे उ समय अपने काला बिघल पर रही। तब मेहरारू अपने नेता से कहिन- 'लाश के आगे चलै का बुलावा'। तौ नेता जी करिन। कथावाचक कहिन; तब हम [इब्न अबू औफा] का कहत सुने रहेन; 'लाश कहाँ है?' ऊ जवाब दिहिस, 'तुम्हारे पीछे'। एक-दुइ बेर अइसा किहिन, फिर कहिन, 'का हम तोहका लाश के सामने आपन पोजीशन लेवे से मना नाहीं किहे रहेन?' तब ऊ एक औरत का आपन छाती पीटत सुनिस। -एक बार अल हजारी कहिन; -एक औरत का विलाप करत सुना।- तौ ऊ कहिस, 'हाह... का हम तोहका ई करै से मना नाहीं किहेन? दरअसल, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल मरात्सी -मृतक के लिए विलाप- मना कर दिया है। आप सब मा से हर एक का यथासंभव रोवै से रोकै दे'। लाश रखै के बाद, उ आगे आवा अऊर तकबीर - अंतिम संस्कार के नमाज - चार तकबीर किहिन, फिर उ एक क्षण खड़ा रहे जब तक कि कुछ मंडली ताशबीह नाहीं किहिन। जब उनकर बात खतम भै तौ पलटि के पूछिन- देखा कि हम पाँच बार तकबीर कहेन? उइ जवाब दिहिन, 'हाँ'। अब्दुल्ला बिन अबू औफा ने कहा, 'वास्तव में रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के चौथा तकबीर करै के बाद उ एक पल के लिए खड़ा रहे। अऊर जब लाश रखी गै, तौ हम उनके साथे बैठेन'। फिर उनसे वश में हिमार मांस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि 'खैबर जुद्ध के समय हम देहात के बाहर वश में हिमार पाये रहे, और उ समय के लोग चाहत रहे तो उई पकाये रहे।' जब बर्तन उबल रहे थे तो अचानक रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का दूत चिल्लाया कि बर्तन उगल दो आखिर मा हम उगल दिहेन'। -अल हजारी- कहिन; हम अब्दुल्ला बिन अबू औफा का हरियर ऊन अऊर रेशम से कढ़ाई वाला कपड़ा पहिन के देखेन।