Imam Ahmad : 18515
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى قَالَ كَانَ زَيْدٌ يُكَبِّرُ عَلَى جَنَائِزِنَا أَرْبَعًا وَأَنَّهُ كَبَّرَ عَلَى جِنَازَةٍ خَمْسًا فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُكَبِّرُهَا
हमसे [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे [स्यूबाह] [अमरू बिन मुर्रा] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से कहिन है, उ कहिन; [जैद बिन अरकम] ने हमरे शरीर के ऊपर -अंतिम संस्कार के दौरान- चार बार तकबीर किहिन, फिर उ पांचवीं बार तकबीर किहिन। तो हमने उनसे पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि 'रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पांचवा तकबीर कहा है'।