Shalat sunnah awwabin (shalat orang yang bertaubat) dua rakaat
Imam Ahmad : 18514
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنِ الْقَاسِمِ الشَّيْبَانِيِّ أَنَّ زَيْدَ بْنَ أَرْقَمَ رَأَى نَاسًا يُصَلُّونَ فِي مَسْجِدِ قُبَاءَ مِنْ الضُّحَى فَقَالَ أَمَا لَقَدْ عَلِمُوا أَنَّ الصَّلَاةَ فِي غَيْرِ السَّاعَةِ أَفْضَلُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ صَلَاةَ الْأَوَّابِينَ حِينَ تَرْمَضُ الْفِصَالُ
हमसे कहिन है [इस्माइल] हमसे [अय्यूब] [अल कासिम असी स्याबानी] से कहिन है कि [जैद बिन अरकाम] ने धुहा के दौरान कुबा मस्जिद मा लोगन का नमाज पढ़त देखिन, तौ उ कहिन, 'का उनका पहिले से पता नाहीं रहा कि ई समय के तुलना मा दूसर समय मा नमाज पढ़ब ज्यादा जरूरी है? दरअसल, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'वास्तव में, पश्चाताप करै वालेन के नमाज तब होत है जब ऊँट दहाड़त हैं - काहे से कि उ गरम होत हैं -'।