Neraka terus meminta tambahan hingga Allah meletakkan kaki-Nya
Imam Bukhari : 6895
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ صَالِحِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ اخْتَصَمَتْ الْجَنَّةُ وَالنَّارُ إِلَى رَبّهِمَا فَقَالَتْ الْجَنَّةُ يَا رَبِّ مَا لَهَا لَا يَدْخُلُهَا إِلَّا ضُعَفَاءُ النَّاسِ وَسَقَطُهُمْ وَقَالَتْ النَّارُ يَعْنِي أُوثِرْتُ بِالْمُتَكَبِّرِينَ فَقَالَ اللَّهُ تَعَالَى لِلْجَنَّةِ أَنْتِ رَحْمَتِي وَقَالَ لِلنَّارِ أَنْتِ عَذَابِي أُصِيبُ بِكِ مَنْ أَشَاءُ وَلِكُلِّ وَاحِدَةٍ مِنْكُمَا مِلْؤُهَا قَالَ فَأَمَّا الْجَنَّةُ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يَظْلِمُ مِنْ خَلْقِهِ أَحَدًا وَإِنَّهُ يُنْشِئُ لِلنَّارِ مَنْ يَشَاءُ فَيُلْقَوْنَ فِيهَا فَ{ تَقُولُ هَلْ مِنْ مَزِيدٍ }ثَلَاثًا حَتَّى يَضَعَ فِيهَا قَدَمَهُ فَتَمْتَلِئُ وَيُرَدُّ بَعْضُهَا إِلَى بَعْضٍ وَتَقُولُ قَطْ قَطْ قَطْ
हमसे कहिन है [उबैदुल्लाह बिन सद बिन इब्राहिम] हमसे कहिन है [याकूब] हमसे कहिन है [मेरे पिता] से [सालीह बिन किसान] से [अल अरज] से [अबू हुरैराह] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहिन: 'स्वर्ग अऊर नरक दुइनौ स्वर्ग के प्रभु के साथ विवाद मा हैं, मैं काहे कहत हौं, कमजोर अऊर आम लोगन के अलावा नाहीं घुसा? ' जबकि नरक कहत है, 'मैं घमंडी लोगन के लिए काहे समर्पित हौं? ' अल्लाह ताआला ने स्वर्ग से जवाब दिया: 'तुम मोर रहमत हौ', अऊर अल्लाह ने नरक से कहा, 'तुम मोर सजा हौ, जेका मैं जेका चाहत हौं, ओका देत हौं, अऊर तुममें से हर एक का ओका पूरा करै का चाही'। पैगम्बर ने कहा: 'जहाँ तक स्वर्ग का सवाल है, तो अल्लाह अपने किसी भी प्राणी के साथ अन्याय नहीं करत है, और अल्लाह नरक को जिसे चाहे भर देगा, फिर उन्हें उसमें फेंक दिया जाएगा' - नरक कहता है, 'क्या अभी भी और है-' -QS. काफ आयत: 30- -उन्होंने तीन बार दोहराया-, फिर अल्लाह ने उनके पैरों के तलवे रखे कि नरक भर गया, उनमें से कुछ ने दूसरों के साथ एक साथ दबाया, नरक ने कहा, 'बहुत, बहुत, बहुत'।