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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 18249

قَالَ قَرَأْتُ عَلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مَهْدِيٍّ : مَالِكٌ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ عَنْ أَبِي حَازِمٍ التَّمَّارِّ عَنِ الْبَيَاضِيِّ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ عَلَى النَّاسِ وَهُمْ يُصَلُّونَ وَقَدْ عَلَتْ أَصْوَاتُهُمْ بِالْقِرَاءَةِ فَقَالَ إِنَّ الْمُصَلِّي يُنَاجِي رَبَّهُ عَزَّ وَجَلَّ فَلْيَنْظُرْ مَا يُنَاجِيهِ وَلَا يَجْهَرْ بَعْضُكُمْ عَلَى بَعْضٍ بِالْقُرْآنِ

-इमाम अहमद- कहिन; हम [अब्दुर्रहमान बिन महदी] का पढ़े हई: [मलिक] से [यह्या बिन सईद] से [मुहम्मद बिन इब्राहिम अत तैमी] से [अबू हाजिम अत तम्मारी] से [अल बयादली] कि रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैही वसल्लम अपने साथियन से मिले खातिर बाहर आए रहे, अऊर उ समय, उ लोग नमाज पढ़त रहे, जब ओनके ध्वनि एक दूसरे के ऊपर पढ़त रहे। त उ कहिन: 'एक मनई जवन प्रार्थना करत है, संक्षेप मा, अपने रब्ब अज्जा वजल्ला से प्रार्थना करत है। यहिसे हर मनई का अपने पढ़े प्रार्थना पर ध्यान देय का चाही, अऊर आप मा से एक का दूसरे भाई के खिलाफ कठोरता से न पढ़ै दे'।