Imam Ahmad : 18203
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ أَخْبَرَنَا هِشَامُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنِ ابْنِ الْأَدْرَعِ قَالَ كُنْتُ أَحْرُسُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ لَيْلَةٍ فَخَرَجَ لِبَعْضِ حَاجَتِهِ قَالَ فَرَآنِي فَأَخَذَ بِيَدِي فَانْطَلَقْنَا فَمَرَرْنَا عَلَى رَجُلٍ يُصَلِّي يَجْهَرُ بِالْقُرْآنِ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَسَى أَنْ يَكُونَ مُرَائِيًا قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ يُصَلِّي يَجْهَرُ بِالْقُرْآنِ قَالَ فَرَفَضَ يَدِي ثُمَّ قَالَ إِنَّكُمْ لَنْ تَنَالُوا هَذَا الْأَمْرَ بِالْمُغَالَبَةِ قَالَ ثُمَّ خَرَجَ ذَاتَ لَيْلَةٍ وَأَنَا أَحْرُسُهُ لِبَعْضِ حَاجَتِهِ فَأَخَذَ بِيَدِي فَمَرَرْنَا عَلَى رَجُلٍ يُصَلِّي بِالْقُرْآنِ قَالَ فَقُلْتُ عَسَى أَنْ يَكُونَ مُرَائِيًا فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَلَّا إِنَّهُ أَوَّابٌ قَالَ فَنَظَرْتُ فَإِذَا هُوَ عَبْدُ اللَّهِ ذُو الْبِجَادَيْنِ
हमसे कहिस है [वाकी'] हमसे [हिस्याम बिन सद] से [जैद बिन असलम] से [इब्न अल अदरा'] कहिस है; एक रात, मैं पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रखवाली करत रहेंव। फिर उ एक काम पर निकला। ऊ हमार हाथ पकड़िस अऊर हम चल दिहेन। तब हम एक आदमी के पास से गुजरे जो जोर से कुरान पढ़ते हुए नमाज पढ़ रहा था, तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'शायद रिया के कारण किया है'। हमने पूछा कि हे अल्लाह के रसूल, क्या उन्होंने नमाज पढ़ी और जोर से कुरान का पाठ नहीं किया? उ हमार हाथ छोड़ दिहिन अऊर फिर कहिन: 'तुम हमसे बहस कइके ई इस्लाम हासिल नाहीं करब'। एक रात, ऊ फिर से एक काम पर बाहर गवा। वहि समय, मैं ओनके देखभाल करत रहौं। फिर उ हमार हाथ पकड़िन अऊर फिर जाके एक मनई के पास से गुजरिन जवन नमाज पढ़त रहा अऊर कुरान पढ़त रहा, अऊर हम कहेन, 'शायद उ रिया के कारण ई किहिन'। तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'नहीं, दरअसल उ एक अइसन मनई रहे जे बहुत पश्चाताप किहिन अऊर अल्लाह के पास लौटि आए'। हम मुड़ेन, अऊर पता चला कि उ अब्दुल्ला दजुल बिजादैन रहे।