इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Rasulullah meletakkan tangan kanannya di atas tangan kirinya dalam shalat

Imam Ahmad : 18121

حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَاصِمِ بْنِ كُلَيْبٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ عَنْ وَائِلٍ الْحَضْرَمِيِّ أَنَّهُ رَأَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَّى فَكَبَّرَ فَرَفَعَ يَدَيْهِ فَلَمَّا رَكَعَ رَفَعَ يَدَيْهِ فَلَمَّا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنْ الرُّكُوعِ رَفَعَ يَدَيْهِ وَخَوَّى فِي رُكُوعِهِ وَخَوَّى فِي سُجُودِهِ فَلَمَّا قَعَدَ يَتَشَهَّدُ وَضَعَ فَخِذَهُ الْيُمْنَى عَلَى الْيُسْرَى وَوَضَعَ يَدَهُ الْيُمْنَى وَأَشَارَ بِإِصْبَعِهِ السَّبَّابَةِ وَحَلَّقَ بِالْوُسْطَى حَدَّثَنَا أَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَاصِمِ بْنِ كُلَيْبٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ عَنْ وَائِلِ بْنِ حُجْرٍ الْحَضْرَمِيِّ أَنَّهُ رَأَى رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرَهُ وَقَالَ فِيهِ وَوَضَعَ يَدَهُ الْيُمْنَى عَلَى الْيُسْرَى قَالَ وَزَادَ فِيهِ شُعْبَةُ مَرَّةً أُخْرَى فَلَمَّا كَانَ فِي الرُّكُوعِ وَضَعَ يَدَهُ عَلَى رُكْبَتَيْهِ وَجَافَى فِي الرُّكُوعِ

हमसे कहिन है [हसीम बिन कासिम] हमसे [स्यूबाह] [अशिम बिन कुलैब] से कहिन है, उ कहिन, हम [अपने पिता] का [वाइल अल हदलरमी] से बतावत सुने रहेन कि उ एक बार पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का नमाज पढ़त देखिन। उ दुइनौ हाथ उठावत तकबीर कहिन। जब उ प्रणाम किहिन, तौ उ फिर से दुइनौ हाथ उठाइन, वइसने जब उ प्रणाम करै से उठिन। फिर प्रणाम करते सजदा करते समय अपने हाथ पसारे ॥ जब ऊ तस्याहुद बैठा, तौ ऊ आपन दाहिना जांघ बाईं जांघ के ऊपर रखिस, फिर आपन दाहिना हाथ - आपन दाहिना जांघ के ऊपर रखिस - अऊर आपन तर्जनी से संकेत दिहिस अऊर आपन बीच वाली उंगली लपेटिस। हमसे कहिन [असवाद बिन अमीर] हमसे [स्यू'बाह] [अशिम बिन कुलैब] से कहिन हैं, उ कहिन, हम [अपने पिता] का [वैल बिन हुजर अल हदलरामी] से बतावत सुने रहेन कि उ एक बार रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का देखे रहे। उ हदीस का भी जिक्र किहिन अऊर उ ओमा कहिन; 'उ आपन दाहिना हाथ बायाँ हाथ के ऊपर रखिन'। फिर एक बार, शुबाह ने यहिमा जोड़ा; 'जब झुकत रहें, तौ उ आपन हाथ घुटनन पर रखत रहें, अऊर आपन बांह अलग-अलग फैलावत रहें'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 679, 1487, 3407, 3840, 4312, 5579, 5899, 8520, 10086, 14829, 16462, 18110, 18121, 21325
Imam Bukhari : 748
Imam Muslim : 832, 833, 834
Imam Abu Dawud : 627, 638, 732, 734, 735
Imam Tirmidzi : 239, 240, 241, 280
Imam Nasa'i : 1020, 1021, 1022, 1023, 1024, 1025, 1026, 1027, 1029
Imam Ibnu Majah : 863, 864, 1051
Imam Darimi : 1322