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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Penangkapan dan pembunuhan Khubaib bin 'Adiy RA oleh Abu Sirwa'ah pada peristiwa Ar-Raji'

Imam Bukhari : 6853

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ أَبِي سُفْيَانَ بْنِ أَسِيدِ بْنِ جَارِيَةَ الثَّقَفِيُّ حَلِيفٌ لِبَنِي زُهْرَةَ وَكَانَ مِنْ أَصْحَابِ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَبَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَشَرَةً مِنْهُمْ خُبَيْبٌ الْأَنْصَارِيُّ فَأَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عِيَاضٍ أَنَّ ابْنَةَ الْحَارِثِ أَخْبَرَتْهُ أَنَّهُمْ حِينَ اجْتَمَعُوا اسْتَعَارَ مِنْهَا مُوسَى يَسْتَحِدُّ بِهَا فَلَمَّا خَرَجُوا مِنْ الْحَرَمِ لِيَقْتُلُوهُ قَالَ خُبَيْبٌ الْأَنْصَارِيُّ وَلَسْتُ أُبَالِي حِينَ أُقْتَلُ مُسْلِمًاعَلَى أَيِّ شِقٍّ كَانَ لِلَّهِ مَصْرَعِيوَذَلِكَ فِي ذَاتِ الْإِلَهِ وَإِنْ يَشَأْيُبَارِكْ عَلَى أَوْصَالِ شِلْوٍ مُمَزَّعِفَقَتَلَهُ ابْنُ الْحَارِثِ فَأَخْبَرَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَصْحَابَهُ خَبَرَهُمْ يَوْمَ أُصِيبُوا

हमसे कहिन है [अबुल यामन] हमसे कहिन है [स्युएब] से [अज़ुहरी] ने हमसे कहा है [अमरू बिन अबू सुफियान बिन उसैद बिन जरीयाह अत्सकाफी] बानी जुहरा का एक सहयोगी है जो अबू हुरैरा के दोस्तों में से एक है, कि [अबू हुरैरा] ने कहा, 'एक बार रसूलुल्लाह सल्लाह अलैह वल्लम वल्लम के दस दोस्तों के बीच भेजा गया था, खुबैब अल अंसारी, तब [उबैदुल्लाह बिन इयादल] ने मुझसे कहा कि [अल हरिथ के बिटिया] ने उनसे कहा, जब उ - बनू हरिथ बिन अमीर बिन नौफाल - इकट्ठा भए, खूबैब बिन 'आदी ने लड़की से ओकरे शरीर के बालन का साफ करै के लिए एक चाकू उधार लिहिन। जब उइ खूबैब का उनके मारे खातिर मना भूमि से बाहर निकालिन, तौ खूबैब अल अंसारी कहिन, 'मुझे कौनो फर्क नाहीं पड़त कि मैं एक मुसलमान के रूप मा मारा जात हौं # अल्लाह के खातिर मोर शरीर के जहाँ भी हिस्सा मारा जात है # जब तक कि ई सब अल्लाह के सार के लिए है # अगर अल्लाह चाहत है तौ ऊ मांस के सब फटे जोड़न का आशीर्वाद देई'। तब खुबैब का अल हरिथ के बेटवा द्वारा मार डावा गा रहा, अऊर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खूबैब अऊर उनके दोस्तन के मृत्यु के खबर अपने दोस्तन तक पहुँचाइन जब उ लोग ओनके ऊपर आई आपदा का अनुभव किहिन।'

Hadith Corroboration :

Imam Bukhari : 2818, 3690, 3777, 3778, 6853