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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 17874

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَاصِمٍ أَخْبَرَنَا حُصَيْنُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَن سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَن الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اضْطَجَعَ الرَّجُلُ فَتَوَسَّدَ يَمِينَهُ ثُمَّ قَالَ اللَّهُمَّ إِلَيْكَ أَسْلَمْتُ نَفْسِي وَفَوَّضْتُ أَمْرِي إِلَيْكَ وَأَلْجَأْتُ إِلَيْكَ ظَهْرِي وَوَجَّهْتُ إِلَيْكَ وَجْهِي رَهْبَةً مِنْكَ وَرَغْبَةً إِلَيْكَ لَا مَلْجَأَ وَلَا مَنْجَا مِنْكَ إِلَّا إِلَيْكَ آمَنْتُ بِكِتَابِكَ الَّذِي أَنْزَلْتَ وَبِنَبِيِّكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ وَمَاتَ عَلَى ذَلِكَ بُنِيَ لَهُ بَيْتٌ فِي الْجَنَّةِ أَوْ بُوِّئَ لَهُ بَيْتٌ فِي الْجَنَّةِ

हमसे कहिन है [अली बिन अशिम] हमसे कहिन है [हुशैन बिन अब्दुर्रहमान] से [सअद उबैदा] से [अल बरा` बिन अजीब] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहिन: 'अगर कोई आदमी लेट जात है, तौ उ अपने दाहिने तरफ तकिया लगावत है अऊर पढ़त है: 'अल्लाहुम असल्लाहु अलैहि नवतु अमरी इलाइका वा अलजा`तू झहरी इलाइका वा वज्जाहतू इलाइका वाझी राघबतन वा रहबतन इलाइका वा ला मलजा`आ वा ला मांजा मिंका इल्ला इलाइका `आमंतू बिकिताबिआदबिया अबिया नाजायल लाडजी अरसाल्टा -हे अल्लाह, मैं अपने आप का तोहरे समर्पित करत हउँ, मैं आपन काम तोहरे समर्पित करत हउँ, मैं तोहरे पास आपन पीठ झुकावत हउँ, अऊर मैं आपन मुँह तोहरे ओर घुमावत हउँ, काहे से कि मैं आशा करत हउँ - तोहार दया प्राप्त करै के लिए - अऊर डरत हउँ - तोहार सजा से, अगर मैं गलती करत हउँ -। तोहरे धमकी से कउनो शरण अऊर मुक्ति नाहीं है, सिवाय तोहरे। हम उ किताब मा विश्वास करत हई जेका आप भेजे हई, अऊर -सत्य- आपके नबी जेका आप भेजे हई-'। अगर ऊ वहि हालत मा मर जात है, तौ ओकरे लिए स्वर्ग मा एक घर बनावा जई'।