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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Membaca: ALLAAHUMMA LAA MAANI'A LIMAA A'THAITA WALAA MU'THIYA LIMAA MANA'TA WALAA YANFA'U DZAL JADDI MINKAL JADD

Imam Ahmad : 17437

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ وَابْنُ بَكْرٍ قَالَا أَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ وحَدَّثَنَا رَوْحٌ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي عَبْدَةُ بْنُ أَبِي لُبَابَةَ أَنَّ وَرَّادًا مَوْلَى الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ أَخْبَرَهُ أَنَّ الْمُغِيرَةَ بْنَ شُعْبَةَ كَتَبَ إِلَى مُعَاوِيَةَ كَتَبَ ذَلِكَ الْكِتَابَ لَهُ وَرَّادٌ إِنِّي سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ حِينَ يُسَلِّمُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ اللَّهُمَّ لَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ قَالَ وَرَّادٌ ثُمَّ وَفَدْتُ بَعْدَ ذَلِكَ عَلَى مُعَاوِيَةَ فَسَمِعْتُهُ عَلَى الْمِنْبَرِ يَأْمُرُ النَّاسَ بِذَلِكَ الْقَوْلِ وَيُعَلِّمُهُمُوهُ

हमसे कहिस है [अब्दुर्राजाक] अऊर [इब्न बकर] दुइनौ कहिन, हमसे कहिन है [इब्न जुरैज] अऊर हमसे कहिस है [रौह] हमसे कहिस है [इब्न जुरैज] हमका [अब्दह बिन अबू लुबाबाह] से कहिस है कि [वार्राद] अल मुघिराह बिन स्यूबाह के गुलाम ने ओका सूचित किहिन कि [अल मुघिराह बिन स्यूबाह] का लिखा रहा। मुआवियाह, लेकिन मुआविया को चिट्ठी जो लिखी थी वो वराद थे, 'मैंने पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम को सलाम के बाद दुआ करते सुना है: 'ला इलाहा इलाल्लाह वहदाहू ला स्यारीका लाहु लाहुल मुलकु वा लाहुल हमदू, अल्लाह लाहुला माला वसल्लाह' मु'थिया लिमा मना'ता वाला यानफा'उ दज़ल जद्दी मिंकल जद्दू -अल्लाह, सर्वशक्तिमान के अलावा, पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है, ओकर कौनो साथी नाहीं है। सब स्तुति अऊर राज्य ओनके लिए है। उ सब कुछ पर सर्वशक्तिमान है। हे अल्लाह, तुम जवन देत हौ, ओका केहू रोक नाहीं सकत है, अऊर जवन तुम रोकत हौ, ओका कोई नाहीं दे सकत है। धन अऊर महिमा बेकार है जब तुमसे तुलना कीन जाय-'। वारराड ने कहा, 'वहिके बाद मोका मुआविया से मिलै भेजा गा रहा, फिर हम ओनका पल्पिट पर कहत सुने रहेन कि लोगन का पढ़ाई के अभ्यास करै अऊर सिखावै का आदेश देत हैं'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 17437, 17456, 17477, 17522
Imam Bukhari : 799, 5855, 6125, 6748
Imam Muslim : 933, 934
Imam Abu Dawud : 1287
Imam Tirmidzi : 275
Imam Nasa'i : 1324, 1325
Imam Ibnu Majah : 869
Imam Darimi : 1315