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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 17137

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ قَالَ ثَنَا شُعْبَةُ عَنِ الْحَكَمِ قَالَ سَمِعْتُ ذَكْوَانَ يُحَدِّثُ عَنْ مَوْلًى لِعَمْرِو بْنِ الْعَاصِ أَنَّهُ أَرْسَلَهُ إِلَى عَلِيٍّ يَسْتَأْذِنُهُ عَلَى أَسْمَاءَ بِنْتِ عُمَيْسٍ فَأَذِنَ لَهُ حَتَّى إِذَا فَرَغَ مِنْ حَاجَتِهِ سَأَلَ الْمَوْلَى عَمْرًا عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَانَا أَوْ نَهَى أَنْ نَدْخُلَ عَلَى النِّسَاءِ بِغَيْرِ إِذْنِ أَزْوَاجِهِنَّ

उ हमसे कहिन [मुहम्मद बिन जाफर] उ कहिन, उ हमसे [स्यू'बाह] [अल हकाम] से कहिन उ कहिन, हम [डजाकवान] का [अपने गुलाम अमरू बिन अश] से बतावत सुने रहेन, कि [अमरू] एक बार ओनका अली के पास अनुमति माँगै के लिए भेजिन ताकि उ असमा बिन उमैस से मिल सकै, तौ अली इ अनुमति दिहिन। ओकर इच्छा पूरी होय के बाद गुलाम ने अमरू से ई बात पूछी। अमरू तब जवाब दिहिस, 'वास्तव मा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमका औरतन से उनके पति के अनुमति के बिना मिलै से मना किहिन हैं'।