Doa bagi orang yang memberikan jamuan makan
Imam Ahmad : 17035
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُمَيْرٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُسْرٍ قَالَ نَزَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى أَبِي قَالَ فَقَرَّبْنَا لَهُ طَعَامًا وَوَطْبَةً فَأَكَلَ مِنْهَا ثُمَّ أُتِيَ بِتَمْرٍ فَكَانَ يَأْكُلُهُ وَيُلْقِي النَّوَى بِأُصْبُعَيْهِ يَجْمَعُ السَّبَّابَةَ وَالْوُسْطَى قَالَ شُعْبَةُ هُوَ ظَنِّي وَهُوَ فِيهِ إِنْ شَاءَ اللَّهُ ثُمَّ أُتِيَ بِشَرَابٍ فَشَرِبَهُ ثُمَّ نَاوَلَهُ الَّذِي عَنْ يَمِينِهِ قَالَ فَقَالَ أَبِي وَأَخَذَ بِلِجَامِ دَابَّتِهِ ادْعُ اللَّهَ لَنَا قَالَ اللَّهُمَّ بَارِكْ لَهُمْ فِيمَا رَزَقْتَهُمْ وَاغْفِرْ لَهُمْ وَارْحَمْهُمْ حَدَّثَنَا رَوْحٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُمَيْرٍ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ بُسْرٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ زَارَهُمْ فَذَكَرَ مَعْنَى حَدِيثِ ابْنِ جَعْفَرٍ
ई हमका [मुहम्मद बिन जाफर] द्वारा बतावा गा है ई हमका [स्युबाह] द्वारा [यजीद बिन खुमेर] से [अब्दुल्लाह बिन बुसर] से बतावा गा है कि उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार मोर पिता के घरे रुके रहे, तौ हम तुरंत ओनका एक दूध का खाना परोसेन - सीसा से -, अऊर उ खा लिहिस। वहिके बाद, ओका खजूर भी चढ़ावा गा रहा, फिर उ फल खाइस अऊर दुइ उंगली से बीज हटाइस; तर्जनी अऊर बीच वाली उंगली'। स्यूबाह ने कहा, 'मेरे अनुमान के अनुसार, उ अपने मुँह से फेंक दिहिस -भगवान करे-'। फिर ओका एक पेय पिलावा गा, ऊ पी लिहिस, ओकरे बाद ऊ अपने दाहिने तरफ के मनई का बचा पेय दिहिस।' अब्दुल्ला ने कहा कि अपने ऊँट के बागडोर पकड़े हुए पिताजी ने कहा कि हमरे लिए अल्लाह से दुआ करो'। त उ प्रार्थना किहिन: 'अल्लाहुम्मा बारिक लहुम फीमा रज़ाकतहुम, वघफिर लहुम, वारहमहुम -हे अल्लाह, तू ओनका जवन ज़ोकी दिहिस है ओका आशीर्वाद दे, माफ करौ अऊर ओनके ऊपर दया करौ'। हमसे कहिस है [रौह] हमसे [स्यूबाह] [यजीद बिन खुमैर] से कहिस है, उ कहिन, हम [अब्दुल्लाह बिन बुसर] का [अपने पिता] से बतावत सुने रहेन, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ओनसे मिले रहे...फिर उ इब्न जाफर के हदीस के अर्थ बताइन।