Imam Ahmad : 17033
حَدَّثَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ قَالَ حَدَّثَنَا صَفْوَانُ قَالَ حَدَّثَنِي يَزِيدُ بْنُ خُمَيْرٍ الرَّحَبِيُّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُسْرٍ الْمَازِنِيِّ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ مَا مِنْ أُمَّتِي مِنْ أَحَدٍ إِلَّا وَأَنَا أَعْرِفُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ قَالُوا وَكَيْفَ تَعْرِفُهُمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ فِي كَثْرَةِ الْخَلَائِقِ قَالَ أَرَأَيْتَ لَوْ دَخَلْتَ صَبْرَةً فِيهَا خَيْلٌ دُهْمٌ بُهْمٌ وَفِيهَا فَرَسٌ أَغَرُّ مُحَجَّلٌ أَمَا كُنْتَ تَعْرِفُهُ مِنْهَا قَالَ بَلَى قَالَ فَإِنَّ أُمَّتِي يَوْمَئِذٍ غُرٌّ مِنْ السُّجُودِ مُحَجَّلُونَ مِنْ الْوُضُوءِ
उ हमसे [अबुल मुघिरा] कहिन, उ कहिन, उ हमसे कहिन [शफवान] उ कहिन, उ हमसे [यजीद बिन खुमेर अर रहबी] [अब्दुल्लाह बिन बुसर] से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम से कहिन, उ कहिन: 'मेरे उम्मत से कोई नाहीं है, सिवाय मोरे, जे ओनका पुनरुत्थान के दिन पहचान लेई'। साथियों ने पूछा कि हे अल्लाह के रसूल इतने जीवों के बीच आप उन्हें कैसे पहचानोगे? उ समझाइन: 'का तुम नाहीं जानत हौ, अगर तुम शबरा मा घुसौ - एक अइसन जगह जहाँ घोड़ा इकट्ठा होत हैं - जहाँ घोड़ा काला अऊर बड़ा होत हैं, तौ वहाँ घोड़ा भी होत हैं जिनके चेहरा अऊर गोड़न पर धारियाँ होत हैं, का तुम ओनका नाहीं पहचानत हौ?' ऊ जवाब दिहिस, 'ठीक है'। तब उ कहिन: 'वास्तव मा, क़ामत के दिन, मोर लोगन के चेहरा, हाथ अऊर गोड़ उनके सजदा अऊर वजू के निशान के कारण चमकिहैं'।